रिपोर्ट – राकेश कुमार
नजीबाबाद (बिजनौर)। थाना मंडावली क्षेत्र में नजीबाबाद ब्लॉक के अंतर्गत स्थित एक हरे-भरे और फलदार आम के बाग पर इन दिनों आरी चलने का मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि सूखे पेड़ों की कटाई के नाम पर वन विभाग से महज 20 पेड़ों की अनुमति ली गई, लेकिन मौके पर करीब 80 पेड़ मौजूद बताए जा रहे हैं और बड़ी संख्या में हरे-भरे फलदार आम के पेड़ों को भी काटा जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर 20 पेड़ों की अनुमति की आड़ में 80 पेड़ों तक कटाई का रास्ता कैसे खुल गया?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस बाग की कटाई के पीछे कॉलोनी विकसित करने की तैयारी है। यदि ऐसा है तो हरे-भरे फलदार पेड़ों की बलि देकर जमीन को खाली करने का यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण के दावों पर भी सवाल खड़े करता है। सूखे पेड़ों के नाम पर यदि हरे-भरे आम के पेड़ काटे जा रहे हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है, जिसकी तत्काल जांच होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और कार्यप्रणाली को लेकर है। जब पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगी जाती है तो क्या अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करते हैं? क्या पेड़ों की संख्या, उनकी प्रजाति और उनकी वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाता है? क्या अनुमति देने से पहले यह देखा जाता है कि पेड़ वास्तव में सूखे हैं या पूरी तरह हरे-भरे और फलदार हैं? यदि मौके पर 80 पेड़ मौजूद थे तो अनुमति केवल 20 पेड़ों की किस आधार पर दी गई और क्या कटाई के दौरान अनुमति की शर्तों का पालन कराया जा रहा है?
यह भी जांच का विषय है कि अनुमति में दर्ज 20 पेड़ों के अलावा अन्य पेड़ों की कटाई तो नहीं की जा रही। यदि ऐसा हो रहा है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या संबंधित वन रक्षक और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया है या फिर अनुमति जारी करने के बाद पूरे मामले को नजरअंदाज कर दिया गया?
चिंता की बात यह भी है कि जिस स्थान पर कथित रूप से पेड़ों की कटाई हो रही है, वह स्थानीय पुलिस चौकी से कुछ ही दूरी पर बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि खुलेआम चल रही इस कटाई पर संबंधित विभागों की नजर क्यों नहीं पड़ रही?
एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण अभियान चलाकर लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने का संदेश देती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से खड़े फलदार आम के पेड़ों को काटे जाने की शिकायतें सामने आना चिंता का विषय है। पौधा लगाकर पेड़ तैयार करने में वर्षों लगते हैं, लेकिन आरी चलाने में कुछ ही मिनट लगते हैं।
