रिपोर्ट: राकेश कुमार, बिजनौर
धामपुर (बिजनौर) ग्राम नौरंगाबाद स्थित राधा इंटर कॉलेज परिसर में आठ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया। कथा के पहले दिन पूरा पंडाल ‘जय-जय श्री राधे’ और ‘वृंदावन बिहारी लाल की जय’ के सामूहिक उद्घोष से गुंजायमान रहा। भक्तिमय माहौल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उमड़े।
भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से मिलते हैं अनेक लाभ: पंडित सुरेंद्र भारद्वाज
संभल से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक पंडित सुरेंद्र भारद्वाज महाराज ने पहले दिन श्रीमद् भागवत ग्रंथ के महात्म्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने वेदव्यास जी द्वारा रचित इस पवित्र ग्रंथ के संदर्भों और तथ्यों की आध्यात्मिक चर्चा की। महाराज श्री ने कहा,
यदि सांसारिक विषयों से ध्यान हटाकर एकाग्रचित होकर निरंतर कथा का श्रवण किया जाए, तो प्राणी को लोक और परलोक दोनों के सुखों की सहज प्राप्ति होती है।
उन्होंने आत्मदेव ब्राह्मण, उनकी पत्नी धुंधली, धुंधकारी और गोकर्ण के जीवन दर्शन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भागवत कथा प्रेत योनि से भी मुक्ति दिला देती है। धुंधकारी का प्रसंग सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
वक्ता और श्रोता का सामंजस्य है ज़रूरी
भक्त और भगवान को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कथावक्ता ने कहा कि जब तक वक्ता और श्रोता के बीच सही सामंजस्य नहीं होता, तब तक कथा श्रवण का सकारात्मक फल नहीं मिलता। उन्होंने श्रद्धालुओं से समय पर पंडाल पहुंचने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि कलश यात्रा में मंगल कलश धारण करने वाली महिलाओं को सुबह-शाम नियमपूर्वक पंडाल में अपने परिवार की ओर से दीपक अवश्य प्रज्वलित करना चाहिए, जिससे घर में सुख, समृद्धि और यश का वास होता है।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु, राधा-कृष्णमय हुआ माहौल
कथा के दौरान कालिया वाला मंदिर से पधारे संगतकार पंडित पारस उपाध्याय ने अपनी मधुर आवाज़ में भजनों की प्रस्तुतियां दीं।
इतनी किरपा सांवरे बनाए रखना, मरते दम तक सेवा में लगाए रखना और सांसों की माला पे सिमरूं मैं राधेश्याम
जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूमने को मजबूर हो गए और पूरा माहौल राधा-कृष्णमय हो गया।
आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ विश्राम
पहले दिन की कथा के मुख्य यजमान राधा इंटर कॉलेज परिवार रहे, जिन्होंने सपरिवार मंत्रोच्चार के बीच सामूहिक पूजन संपन्न किया। कार्यक्रम के समापन पर मुख्य आरती उतारी गई और उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
