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चीनी के दाम 60 रुपये किलो पार, गन्ने का मूल्य 500 रुपये क्विंटल घोषित करे सरकार: धर्मेंद्र मलिक

रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने गन्ना किसानों की समस्याओं, बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान और खाद की किल्लत को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि देश में चीनी के दाम 60 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गए हैं, जबकि गन्ने के मूल्य में लागत के अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में सरकार को किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए गन्ने का मूल्य कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन मांगों को लेकर 16 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके साथ ही धर्मेंद्र मलिक ने एक किसान संगठन पर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगने का आरोप लगाया और कहा कि ज्ञानेश के इस्तीफे से किसानों का कोई फायदा नहीं होगा।

धर्मेंद्र मलिक ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चीनी के दामों में वृद्धि हुई है, लेकिन इसके मुकाबले गन्ने के मूल्य में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर चीनी की स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में भी इसके दाम कम होने की संभावना नहीं दिख रही है। ऐसे में किसानों को उनकी फसल का उचित एवं लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई बेमौसम बारिश से उत्तर भारत के किसानों को भारी नुकसान हुआ है। धान और उड़द की फसलें प्रभावित हुई हैं, जबकि गन्ने की फसल गिरने से किसानों की लागत और मेहनत दोनों बढ़ गई हैं। किसानों की इन समस्याओं को देखते हुए सरकार को फसलों के नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देना चाहिए।

खाद, बीज और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग

धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि सरकार ने यूरिया और एनपीके जैसे उर्वरकों पर सब्सिडी बढ़ाई है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को जरूरत के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के नाम पर मिलने वाली सब्सिडी वाले यूरिया का गैर-कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने की शिकायतें भी सामने आती हैं। इस पर प्रभावी निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी सरकार की है।

उन्होंने कहा कि संगठन खाद, बीज और कृषि दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए बुवाई से लेकर फसल की कटाई तक किसानों के हित में संघर्ष करेगा। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर कृषि सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

16 अक्टूबर को प्रदेशभर में प्रदर्शन

धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर संघर्ष करना जरूरी है, क्योंकि बिना आंदोलन और दबाव के सरकारें किसानों की आवाज पर गंभीरता से ध्यान नहीं देतीं। उन्होंने कहा कि 16 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने, बारिश से बर्बाद फसलों का मुआवजा देने और आलू किसानों को राहत प्रदान करने की मांग उठाई जाएगी।

उन्होंने किसान संगठनों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों की सामूहिक ताकत का इस्तेमाल उनके हितों के लिए होना चाहिए। किसान संगठनों को किसानों की वास्तविक समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि उनकी ताकत का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए करना चाहिए।

प्रदेश अध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा बोले- 45 लाख गन्ना किसानों की आवाज उठाएंगे

भाकियू अराजनैतिक के प्रदेश अध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा ने भी बेमौसम बारिश से किसानों को हुए नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण धान, गन्ना और अरहर सहित विभिन्न फसलों को नुकसान पहुंचा है। संगठन सरकार से किसानों को राहत देने और गन्ने का उचित मूल्य घोषित करने की मांग कर रहा है।

हरनाम सिंह वर्मा ने कहा कि जब बाजार में चीनी के दाम 60 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच चुके हैं, तो गन्ना किसानों को कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर को संगठन के पदाधिकारी प्रदेश के सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। वह स्वयं गन्ना आयुक्त कार्यालय पहुंचकर प्रदेश के करीब 45 लाख गन्ना किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों को अधिकारियों के समक्ष रखेंगे।

उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई कराना संगठन की प्राथमिकता है।

संगठन में अनुशासन बनाए रखने पर दिया जोर

प्रदेश अध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा ने संगठन के आंतरिक मामलों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार या संगठन में छोटे-मोटे मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन समस्याओं का समाधान आपसी बातचीत और अनुशासन के माध्यम से किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि संगठन के किसी पदाधिकारी या कार्यकर्ता को उनसे, राष्ट्रीय नेतृत्व से अथवा किसी अन्य पदाधिकारी से कोई शिकायत है, तो वह लिखित रूप में अपनी बात रख सकता है। शिकायतों को सुना जाएगा और उनका उचित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि संगठन के लोगों की ऑडियो या वीडियो बनाकर उन्हें वायरल करने के बजाय आंतरिक समस्याओं को संगठन के सामने रखा जाना चाहिए।

हरनाम सिंह वर्मा ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि संगठन में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी के अनुसार काम करना चाहिए। जिला अध्यक्षों को प्रदेश नेतृत्व की भूमिका निभाने के बजाय अपने निर्धारित दायित्वों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाकियू अराजनैतिक विचारधारा पर आधारित संगठन है, जहां फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।

मुजफ्फरनगर में पंचायत करने की भी तैयारी

हरनाम सिंह वर्मा ने संकेत दिया कि संगठन की आंतरिक परिस्थितियों और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में पंचायत आयोजित करने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पंचायत के लिए इसी महीने की 28 या 30 तारीख अथवा अगले महीने की 3 तारीख पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, पंचायत की अंतिम तारीख की औपचारिक घोषणा के संबंध में उन्होंने स्पष्ट जानकारी नहीं दी।

उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर जनपद ने लंबे समय तक किसानों के हक और गन्ने का उचित मूल्य दिलाने के आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में संगठन यह समझना चाहता है कि यहां किसान आंदोलन की स्थिति में बदलाव क्यों आया है। उन्होंने कहा कि संगठन किसानों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखेगा।

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