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विश्व ध्यान दिवस से पहले डॉ नीलम रॉय वर्मा ने छात्र-छात्राओं को ध्यान साधना के लिए किया प्रेरित

रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। मुज़फ़्फ़रनगर में 21 दिसंबर को मनाए जाने वाले विश्व ध्यान दिवस के उपलक्ष्य में एक स्थानीय कॉलेज में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जनपद के एसएसपी संजय कुमार वर्मा की पत्नी डॉ नीलम रॉय वर्मा ने सैकड़ों छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए उन्हें ध्यान साधना के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान कॉलेज परिसर में बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे, जिन्होंने ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को गंभीरता से सुना।

डॉ नीलम रॉय वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति किसी न किसी तरह के तनाव और मानसिक दबाव से गुजर रहा है। खासकर छात्र-छात्राओं पर पढ़ाई, प्रतियोगिता और भविष्य को लेकर लगातार दबाव बना रहता है, जिसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे में ध्यान साधना व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है और मन को शांत रखने में सहायक होती है। उन्होंने कहा कि नियमित ध्यान से न केवल तनाव कम होता है, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होती है।

उन्होंने बताया कि ध्यान के माध्यम से इंसान अपने भीतर झांक पाता है और खुद को बेहतर तरीके से समझ सकता है। इससे निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना सहजता से कर पाता है। डॉ नीलम रॉय वर्मा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे मोबाइल और सोशल मीडिया से कुछ समय निकालकर ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि मानसिक संतुलन बना रहे और जीवन में स्पष्टता आए।

डॉ नीलम रॉय वर्मा ने यह भी बताया कि वह वर्ष 2005 से आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ी हुई हैं और पिछले चार वर्षों से नियमित रूप से इसकी शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सुदर्शन क्रिया और ध्यान साधना के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। उनका प्रयास है कि इन तकनीकों को जन-जन तक पहुंचाया जाए, ताकि समाज को तनावमुक्त और स्वस्थ बनाया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और कई विद्यार्थियों ने ध्यान को अपनाने की इच्छा भी जताई। विश्व ध्यान दिवस से पहले आयोजित इस कार्यक्रम को युवाओं के मानसिक और भावनात्मक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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