15 लाख की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड दबोचा, एसएसपी बोले- ऑनलाइन लालच के जाल से बचें

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रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। जनपद में ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। लोगों को फर्जी कॉल कर सस्ते मोबाइल, प्रिंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने का झांसा देकर यूपीआई के माध्यम से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपी पर अब तक करीब 15 लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के आरोप सामने आ चुके हैं। पुलिस ने उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है। कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार के निर्देशन में थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम ने अंजाम दी।
गृह मंत्रालय भारत सरकार के ऑनलाइन पोर्टल “प्रतिबिम्ब” पर मुजफ्फरनगर जनपद से संबंधित कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें फर्जी कॉल के जरिए लोगों से ठगी किए जाने की बात सामने आई थी। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तकनीकी और बैंकिंग साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। जांच में धोखाधड़ी में प्रयुक्त मोबाइल नंबर और बैंक खाते मुजफ्फरनगर से संचालित पाए गए। इसके बाद पुलिस टीम ने पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाते हुए उसे धर दबोचा।
गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान सचिन स्वामी पुत्र जितेंद्र के रूप में हुई है। उसका मूल पता 99, राजा रोड, धामावाला, दुर्गा मंदिर, देहरादून, उत्तराखंड है, जबकि वर्तमान में वह गली नंबर 12, गांधी कॉलोनी, थाना नई मंडी, जनपद मुजफ्फरनगर में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक आरोपी लंबे समय से साइबर ठगी के इस खेल में सक्रिय था और भोले-भाले लोगों को ऑनलाइन खरीदारी के नाम पर निशाना बना रहा था।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह वर्ष 2025 से विभिन्न मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर लोगों को सस्ते मोबाइल, प्रिंटर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य उत्पाद बेचने का झांसा देता था। सोशल मीडिया, ऑनलाइन मार्केटप्लेस और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए वह ग्राहकों से संपर्क करता, फिर भरोसा जीतने के लिए फर्जी फोटो, नकली बिल और बनावटी कोरियर रसीद भेजता था। जैसे ही कोई व्यक्ति एडवांस भुगतान यूपीआई या बैंक ट्रांसफर के माध्यम से कर देता, आरोपी नंबर बंद कर देता या पीड़ित को ब्लॉक कर देता और सामान कभी नहीं भेजता था।
पुलिस जांच में अब तक यह तथ्य सामने आया है कि अभियुक्त के 05 मोबाइल नंबरों पर 16 शिकायतें और 04 बैंक खातों पर 18 शिकायतें दर्ज पाई गई हैं। अब तक ज्ञात शिकायतों में लगभग 15 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी उजागर हुई है। पुलिस अब उसके खातों, लेनदेन और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी भी जुटा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर ठगी की रकम और शिकायतों की संख्या बढ़ सकती है।
आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। उसके खिलाफ साइबर क्राइम थाना चंडीगढ़ में भी धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है और वह पूर्व में वहां से जेल जा चुका है। मुजफ्फरनगर में उसके खिलाफ मु0अ0सं0 13/2026 धारा 318(4) बीएनएस तथा 66सी, 66डी आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज है। वहीं चंडीगढ़ में भी उसके विरुद्ध कई गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार ने कहा कि साइबर ठग अब लोगों को सस्ते सामान, आकर्षक ऑफर और फर्जी ऑनलाइन डील के जाल में फंसाकर ठगी कर रहे हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी अनजान कॉल, सोशल मीडिया विज्ञापन या संदिग्ध ऑनलाइन ऑफर पर बिना जांच-परख भरोसा न करें। एडवांस भुगतान करने से पहले विक्रेता की सत्यता की पुष्टि करें और किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करें। एसएसपी ने कहा कि जनपद पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस कार्रवाई में निरीक्षक सुल्तान सिंह, निरीक्षक रविन्द्रपाल सिंह, निरीक्षक प्रदीप कुमार, उपनिरीक्षक गौरव चौहान, उपनिरीक्षक मुबारिक हसन, हेड कांस्टेबल सुनील कुमार, हेड कांस्टेबल बालकिशन, हेड कांस्टेबल सोनबीर सिंह और कांस्टेबल राहुल कुमार की भूमिका अहम रही।
मुजफ्फरनगर पुलिस की यह कार्रवाई उन साइबर अपराधियों के लिए साफ संदेश है, जो इंटरनेट और डिजिटल भुगतान की आड़ में लोगों की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। समय रहते की गई पुलिस कार्रवाई ने न सिर्फ एक शातिर ठग को सलाखों तक पहुंचाया है, बल्कि आम लोगों को भी यह चेतावनी दी है कि ऑनलाइन बाजार में हर चमकती चीज सोना नहीं होती।

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