रक्षा मंत्री तक पहुंची ‘आशिवी’ की आवाज, शहीद परिवारों के सम्मान और हक की मजबूत पैरवी

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रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। शहीद सैनिक की पत्नी और लेखिका शिवी स्वामी की पुस्तक “आशिवी – शहीद से एक पत्नी की शिकायत” अब केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि शहीद परिवारों की पीड़ा, वीरांगनाओं के संघर्ष और सैनिकों के सम्मान की सशक्त आवाज बनकर उभर रही है। हाल ही में शिवी स्वामी ने देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाक़ात कर अपनी यह पुस्तक उन्हें भेंट की। इस दौरान रक्षा मंत्री ने पुस्तक को गंभीरता से देखा, उसके उद्देश्य को समझा और इसे सैनिकों तथा उनके परिवारों के जीवन की भावनात्मक सच्चाइयों को सामने लाने वाला प्रेरक प्रयास बताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस तरह की रचनाएँ समाज को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवान केवल वर्दीधारी नाम नहीं होते, बल्कि उनके पीछे सपनों, उम्मीदों, त्याग और इंतजार से भरे परिवार खड़े होते हैं। उन्होंने माना कि सैनिकों के साहस और बलिदान को शब्द देना आसान नहीं है, लेकिन जब कोई वीरांगना अपने व्यक्तिगत दुःख को समाज के सरोकार में बदल देती है, तो वह रचना केवल साहित्य नहीं रह जाती, बल्कि चेतना का दस्तावेज बन जाती है।
मुलाक़ात के दौरान शिवी स्वामी ने रक्षा मंत्री के सामने सैनिक परिवारों, खासतौर पर वीरांगनाओं के रोजगार, आत्मनिर्भरता, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि देश में ऐसे अनेक सैनिक परिवार हैं, जो शहादत के बाद भावनात्मक और आर्थिक दोनों स्तरों पर कठिन संघर्ष से गुजरते हैं। कई वीरांगनाओं को समाज में सम्मान तो मिलता है, लेकिन स्थायी सहयोग, रोजगार के अवसर और व्यवस्थित सहारा आज भी बड़ी जरूरत बने हुए हैं।
शिवी स्वामी ने यह भी महसूस कराया कि शहादत केवल सीमा पर नहीं होती, उसका असर घर के भीतर बहुत गहराई तक उतरता है। एक सैनिक का बलिदान उसके परिवार के जीवन को हमेशा के लिए बदल देता है। ऐसे में यह जरूरी है कि शहीद परिवारों के सम्मान के साथ-साथ उनके भविष्य की सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, महिलाओं के रोजगार और सामाजिक पुनर्स्थापन पर भी गंभीरता से काम हो। रक्षा मंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और इस विषय की महत्ता को स्वीकार करते हुए सकारात्मक पहल की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस पुस्तक की गूंज इससे पहले भी प्रशासनिक स्तर पर सुनाई दे चुकी है। मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा को भी शिवी स्वामी यह पुस्तक भेंट कर चुकी हैं। उस दौरान एसएसपी ने भी पुस्तक की सराहना करते हुए इसे बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली प्रयास बताया था। उन्होंने माना था कि इस तरह की रचनाएँ समाज को शहीद परिवारों की भावनाओं से जोड़ने का काम करती हैं और उन दर्दों को सामने लाती हैं, जो अक्सर सार्वजनिक मंचों की औपचारिक संवेदनाओं के बीच दब जाते हैं।
यही वजह है कि “आशिवी – शहीद से एक पत्नी की शिकायत” अब लगातार चर्चा में है। यह पुस्तक एक पत्नी के मन की शिकायत जरूर है, लेकिन उसमें केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि उन तमाम वीरांगनाओं की आवाज भी सुनाई देती है, जो शहादत के बाद अपने जीवन को नए सिरे से संभालने की चुनौती से जूझती हैं। पुस्तक यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या शहीद के सम्मान की परंपरा केवल श्रद्धांजलि तक सीमित रहनी चाहिए, या फिर उसके परिवार के भविष्य को भी राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
शिवी स्वामी की पहल इस मायने में खास है कि उन्होंने अपने दर्द को निजी दायरे में कैद नहीं रहने दिया, बल्कि उसे समाज, प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने का साहस दिखाया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाक़ात और उससे पहले एसएसपी संजय कुमार वर्मा द्वारा पुस्तक की सराहना, यह संकेत देती है कि यह आवाज अब सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक और नीतिगत विमर्श का हिस्सा बनती जा रही है।
आज जब देश शहीदों की वीरता को नमन करता है, तब यह भी उतना ही जरूरी हो जाता है कि उनके परिवारों की चुनौतियों पर गंभीरता से विचार किया जाए। वीरांगनाओं को आत्मनिर्भर बनाने, सैनिक परिवारों को सम्मानजनक अवसर देने और शहादत के बाद भी उनके जीवन को सुरक्षित व गरिमामय बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना समय की मांग है। “आशिवी” इसी सोच को शब्द देती है, और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत भी है।
शिवी स्वामी की यह पुस्तक अब एक साहित्यिक कृति से आगे बढ़कर शहीद परिवारों की वेदना, संघर्ष, सम्मान और अधिकार की आवाज बनती दिखाई दे रही है। यह मुलाक़ातें इस बात का संकेत हैं कि वीरांगनाओं का दर्द अब अनसुना नहीं रहेगा। उनकी बात व्यवस्था के शीर्ष तक पहुंच रही है, और यही किसी भी संवेदनशील समाज की सबसे बड़ी पहचान होती है।

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