शंकराचार्य के अपमान का आरोप: राष्ट्रवादी ब्राह्मण महासंघ ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर न्यायिक जांच की मांग उठाई

Spread the love

रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ़्फ़रनगर। संगम नगरी प्रयागराज में माघ मास की अमावस्या के अवसर पर जोशीमठ के वर्तमान जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के साथ कथित रूप से हुई पुलिस अभद्रता को लेकर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। राष्ट्रवादी ब्राह्मण महासंघ (पंजीकृत) ने इस प्रकरण को सनातन परंपराओं पर सीधा आघात बताते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रेषित कर उच्चस्तरीय न्यायिक जांच और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की मांग की है।
महासंघ के जिलाध्यक्ष पं. सुभाषचन्द गौतम की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि 18 जनवरी को संगम स्नान के लिए जाते समय जगतगुरु शंकराचार्य और उनके शिष्यों, सेवकों व समर्थकों के साथ जो व्यवहार हुआ, वह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि सनातन धर्म के सर्वोच्च पद का अपमान है। संगठन का आरोप है कि यह घटना किसी प्रशासनिक चूक का परिणाम नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से की गई ऐसी कार्रवाई है, जिसने करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की भावनाओं को आहत किया है।
महासंघ ने उत्तर प्रदेश सरकार और मेला प्रबंधन के उच्च अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा है कि धर्मनगरी प्रयागराज जैसे पुण्य क्षेत्र में इस प्रकार की घटना भविष्य में धार्मिक असुरक्षा, भ्रम और सामाजिक अशांति को बढ़ावा दे सकती है। पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में इस तरह का कृत्य सनातन धर्म का अपमान और उस पर हमला माना जाएगा।
संगठन ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच अन्य तीन जगतगुरु शंकराचार्यों में से किसी एक की निगरानी में कराई जाए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे और सच्चाई सामने आ सके। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो देशभर के सनातन धर्मावलंबी स्वयं को अपमानित और असुरक्षित महसूस करेंगे।
महासंघ का कहना है कि धर्म और राजनीति के टकराव को रोकने के लिए न्यायिक जांच और दोषियों को दंड देना अनिवार्य है। इस मांग के साथ महासंघ के कई पदाधिकारियों और सदस्यों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *