रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। गरीब, असहाय और बेघर परिवारों को छत मुहैया कराने के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री आवास योजना मुजफ्फरनगर में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जनपद के कई इलाकों, खासकर वार्ड संख्या 43 से सामने आए मामलों ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक वार्ड संख्या 43 में कई ऐसे लोग योजना का लाभ ले चुके हैं, जिनके पास पहले से ही बड़े पक्के मकान और प्लॉट मौजूद हैं। आरोप है कि इन अपात्र लोगों ने संबंधित अधिकारियों को मोटा कमीशन देकर अपने प्लॉटों पर लगभग ढाई लाख रुपये की आवासीय धनराशि स्वीकृत करा ली। हैरानी की बात यह है कि कुछ लोगों ने इन मकानों का निर्माण कराने के बाद उन्हें किराये पर भी चढ़ा दिया, जबकि वास्तविक जरूरतमंद आज भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई तथाकथित लाभार्थी योजना की पात्रता की शर्तों पर खरे नहीं उतरेंगे। यह न सिर्फ सरकार की जनकल्याणकारी मंशा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि गरीबों के अधिकारों पर सीधा डाका भी है।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के युवा महानगर अध्यक्ष वसीम खान ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किए गए सभी आवंटनों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जिन अपात्र लोगों ने गलत जानकारी या लेन-देन के जरिए योजना का लाभ लिया है, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और वास्तविक गरीब व पात्र परिवारों को उनका हक दिलाया जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर आरोपों पर कब तक संज्ञान लेता है और क्या गरीबों के नाम पर चल रही योजनाओं में हो रही इस लूट पर लगाम लग पाती है या नहीं।
