रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को अचानक मुजफ्फरनगर पहुंचे। दिल्ली से देहरादून सड़क मार्ग से जाते समय उनका काफिला कुछ देर के लिए मुजफ्फरनगर स्थित पुलिस लाइन में रुका। मुख्यमंत्री का यह ठहराव भले ही अल्पकालिक रहा, लेकिन उनके दौरे ने राजनीतिक, ऐतिहासिक और प्रशासनिक हलकों में खासा संदेश दे दिया। पुलिस लाइन से मुख्यमंत्री सीधे हेलिकॉप्टर द्वारा देहरादून के लिए रवाना हो गए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह दौरा पूरी तरह अनौपचारिक और परिस्थितिजन्य था।
मुख्यमंत्री के पुलिस लाइन पहुंचते ही प्रशासन और भाजपा संगठन में हलचल तेज हो गई। उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के साथ भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन के अधिकारी उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे। सीमावर्ती जनपद होने के चलते सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह चाक-चौबंद दिखाई दी।
पुलिस लाइन में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुजफ्फरनगर को उत्तराखंड से भावनात्मक और ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य स्थापना आंदोलन की कई अहम घटनाएं और स्मृतियां इस धरती से जुड़ी हैं। रामपुर तिराहा कांड का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आंदोलन के इतिहास का एक दर्दनाक लेकिन अविस्मरणीय अध्याय है। उन्होंने दोहराया कि वे हर वर्ष 2 अक्टूबर को उत्तराखंड आंदोलनकारियों और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
चारधाम यात्रा के दौरान मोबाइल नेटवर्क और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा का स्वरूप हर वर्ष और अधिक व्यापक हो रहा है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए संचार व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और प्रशासनिक निगरानी को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
प्रयागराज महाकुंभ को लेकर शंकराचार्य और सरकार के बीच कथित विवाद पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ शब्दों में कहा कि यह कोई राजनीतिक विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए और सभी को आपसी समन्वय और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री का यह संक्षिप्त प्रवास भले ही औपचारिक कार्यक्रमों से रहित रहा, लेकिन उनके बयान और ठहराव ने मुजफ्फरनगर को एक बार फिर उत्तराखंड आंदोलन और चारधाम यात्रा जैसे बड़े मुद्दों से जोड़ दिया। प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को प्रतीकात्मक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
