रिपोर्ट – एकरार खान

गाजीपुर। मनिहारी ब्लॉक की 97 ग्राम पंचायतों में करीब 70 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को लेकर अब बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। कागजों में विकास की लंबी-चौड़ी कहानी लिखी गई, लेकिन जमीन पर सन्नाटा पसरा हुआ है। सवाल सीधा है—क्या 70 करोड़ रुपये से विकास हुआ या सिर्फ कागजी खेल खेला गया?
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार मनरेगा समेत कई योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये खर्च दिखाए गए हैं। दावा किया गया कि इस धनराशि से सड़क, नाली, खड़ंजा, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कराया गया। लेकिन जब गांवों की हकीकत देखी गई, तो तस्वीर पूरी तरह उलट नजर आई।
ग्रामीणों का आरोप है कि “काम कहीं दिखता नहीं, लेकिन कागजों में सब पूरा है।” गांवों में आज भी टूटी सड़कें, बजबजाती नालियां और जर्जर व्यवस्था लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई हैं। लोगों का गुस्सा साफ झलक रहा है—“अगर 70 करोड़ खर्च हुआ, तो विकास कहां गया?”
सूत्रों की मानें तो कई ग्राम पंचायतों में बिना काम कराए ही फाइलों में योजनाएं पूरी दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया। यानी “काम जीरो, भुगतान हीरो” का खेल चलता रहा। इससे पूरे मामले में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
आरोप यह भी हैं कि इस पूरे खेल में कुछ जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत हो सकती है, जिन्होंने मिलकर सरकारी धन का बंदरबांट किया। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात कई सवाल जरूर खड़े कर रहे हैं।
ग्रामीणों और जागरूक लोगों में इस मामले को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर इस भारी-भरकम रकम का सही उपयोग होता, तो मनिहारी ब्लॉक आज विकास की मिसाल बन सकता था। लेकिन अब यह मामला “विकास” से ज्यादा “घोटाले” की चर्चा में आ गया है।
लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर गहराई से जांच हुई, तो 70 करोड़ रुपये के इस खेल का सच सामने आ सकता है और कई बड़े नाम उजागर हो सकते हैं।
फिलहाल जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी इस मामले को और संदिग्ध बना रही है। अब सबकी नजर प्रशासन पर है—क्या इस मामले की सच्चाई सामने आएगी या फिर यह भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
मनिहारी ब्लॉक में 70 करोड़ का यह मामला अब सिर्फ विकास नहीं, बल्कि भरोसे और सिस्टम की पारदर्शिता की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

