रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। जनपद में बहने वाली काली नदी पूर्वी के बढ़ते प्रदूषण को लेकर प्रशासन अब गंभीर नजर आ रहा है। नदी के संरक्षण और जल गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस योजना के तहत नदी के जल के नमूने लेकर उनका वैज्ञानिक विश्लेषण कराया जाएगा, जिससे प्रदूषण के वास्तविक स्तर और कारणों की सटीक जानकारी मिल सके।
उप कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही ने बताया कि विकास खंड खतौली के अंतर्गत आने वाले दस गांव—अंतवाड़ा, पलड़ी, रसूलपुर कैलोरा, खोकनी, वाजिदपुर खुर्द, गालिबपुर, जंधेड़ी जाटान, जसौला, सिकंदरपुर खुर्द और कढली—के किनारे बहने वाली काली नदी पूर्वी के संरक्षण को लेकर प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी और कृषि विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में नदी में बढ़ते प्रदूषण के प्रमुख कारणों पर विस्तार से चर्चा हुई।
अधिकारियों ने बताया कि खेतों में उपयोग होने वाले रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक वर्षा के पानी के साथ बहकर नदी में पहुंच जाते हैं, जिससे जल प्रदूषित हो रहा है और जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए किसानों को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नदी किनारे स्थित कृषि भूमि पर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग को सीमित कर किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही ‘वॉटर रनऑफ’ को रोकने के उपाय भी योजना में शामिल किए जाएंगे, ताकि प्रदूषक तत्व नदी तक पहुंचने से पहले ही नियंत्रित किए जा सकें।
प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो काली नदी पूर्वी का पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। ऐसे में प्रस्तावित कार्ययोजना न केवल नदी के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि आसपास के ग्रामीणों और किसानों के लिए भी दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करेगी।

