बेसिक शिक्षा का हुआ बुरा हाल विद्यालयों में नहीं शिक्षक और नौनिहाल

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-सरकारी विद्यालयों में शिक्षण कार्य ध्वस्त सभी शिक्षक और स्टॉफ व्यस्त

रिपोर्ट सौरभ अग्रवाल

फिरोजाबाद । सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार एक तरफ तो, ‘स्कूल चलो अभियान’ के नाम पर घर- घर शिक्षा के दीप जलाने का प्रचार- प्रसार करते हुए नहीं थक रही है। वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार प्रशासनिक उच्चाधिकारियों द्वारा बिना किसी सोच समझ – विचार विमर्श या कोई कार्य योजना तैयार किए विगत सात महीनों से जिला बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को विधान सभा और ग्राम पंचायत के सुपरवाइजर तथा बीएलओ का दायित्व सौंपते हुए एस आई आर प्रक्रिया पूर्ण करने तथा नए वोट बनाने की प्रकिया से लेकर संशोधित वोटर लिस्ट को ऑनलाइन करने में लगा दिया गया है। वही विभागीय प्रशिक्षण भी दिये जा रहे हैं साथ ही समय-समय पर सरकारी तंत्र व राजनेताओं को खुश करने और आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए भीड़ जुटाने में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की सेवाओं का जमकर गलत प्रयोग किया जा रहा है। शेष बचे विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी यूपी बोर्ड के हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में कक्ष निरीक्षक के रूप में लगा दी गई है और शिक्षा मित्र व अनुदेशको के भरोसे विद्यालय का संचालन किया जा रहा है जिसमें भी कहीं-कहीं अनुदेशकों और शिक्षामित्र को कंट्रोल रूम में ड्यूटी करने के लिए लगाया गया है। विद्यालय का समस्त स्टॉफ विभिन्न कार्यों में लगा दिया गया है। जिसका बुरा असर विद्यालय में बच्चों की शिक्षा व उपस्थिति पर पड़ रहा है और सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत कमजोर आय वर्ग व गरीब छात्र-छात्राओं का भविष्य खतरे में दिखाई देने लगा है। शायद यही कारण है कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पूर्व में जारी किए गए आदेश के बावजूद किसी भी अधिकारी ने अपने बाल गोपालों का प्रवेश आज तक सरकारी स्कूलों में नहीं कराया है और ना हीं सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले किसी बच्चे की जिम्मेदारी ही ली है।
बताते चलें कि फिरोजाबाद ब्लॉक में प्राथमिक विद्यालय खंगरई,उच्च प्राथमिक विद्यालय अलीनगर केन्जरा, उच्च प्राथमिक विद्यालय लतुर्रा के प्र.अ. और इं प्र.अ. की ड्यूटी बोर्ड एग्जाम में लगाई गई है। सिर्फ फिरोजाबाद ब्लॉक ही नहीं जसराना ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय नगला पर्डमान, उच्च प्राथमिक विद्यालय उतरारा, शिकोहाबाद ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय अरौनी, उच्च प्राथमिक विद्यालय नगला जोरे, एका ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय आजमपुर सिलौटा, प्राथमिक विद्यालय नगला मदार प्राथमिक विद्यालय नगला स्वामी इत्यादि विद्यालयों सहित अन्य ब्लॉक में संचालित लगभग सभी बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों की यही स्थिति है कि विद्यालय का संचालन एक अध्यापक अथवा शिक्षा मित्र या अनुदेशक तथा अन्य विद्यालय के स्टाफ के द्वारा किया जा रहा है। हाल यहां तक खराब है कि फिरोजाबाद ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय गाजीपुर में कुल 5 का स्टॉफ है। जिसमें प्रधानाध्यापक बी एल ओ और दो सहायक अध्यापक में से एक बी एल ओ तथा एक सहायक अध्यापक की ड्यूटी बोर्ड एग्जाम में कक्ष निरीक्षक के रूप में तथा दो शिक्षामित्र की ड्यूटी बी एल ओ में लगी है। स्कूल में न शिक्षक दिखाई दे रहे हैं और ना हीं छात्र – छात्राएं।
अब सवाल यह उठता है कि, शासन प्रशासन की मंशा के अनुसार वर्ष 2026 – 27 के लिए डोर टू डोर पहुंचकर शिक्षा का दीप जलाने वाले शिक्षक बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में ज्यादा से ज्यादा नामांकन कैसे करा पाएंगे जबकि, शिक्षा का स्तर शून्य और सरकारी तंत्र के सभी दावे खोखले दिखाई देने लगे हैं ?

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