रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। मुज़फ्फरनगर में आज सियासत सड़कों पर उतर आई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत जोरदार पदयात्रा निकालकर केंद्र और प्रदेश सरकार पर सीधा हमला बोला। झांसी की रानी चौराहे से शुरू हुई यह पदयात्रा कचहरी गेट स्थित अंबेडकर मूर्ति तक पहुंची, जहां सभा में सरकार की नीतियों को गरीब, किसान और मजदूर विरोधी बताते हुए तीखा प्रहार किया गया। नेताओं ने आरोप लगाया कि मनरेगा को कमजोर कर गांव की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ी जा रही है।
शुक्रवार को शहर की सड़कों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ा। हाथों में तख्तियां, मुंह पर नारे और दिल में आक्रोश—“मनरेगा बचाओ” की गूंज पूरे शहर में सुनाई दी। पदयात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे सरकार के खिलाफ आवाजें और बुलंद होती गईं।
सभा को संबोधित करते हुए हापुड़ से पूर्व विधायक रह चुके गजराज सिंह ने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि गांव के गरीब परिवारों की जीवनरेखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पूरी तरह केंद्र के अधीन संचालित योजना का ढांचा बदलकर इसे कमजोर किया जा रहा है। बजट संरचना में बदलाव से मजदूरों को समय पर काम और भुगतान नहीं मिल पा रहा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा रही है।
किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज चौधरी ने मंच से दो टूक कहा कि सरकार की नीतियां खेत और खलिहान दोनों पर सीधी चोट हैं। उन्होंने कहा कि जब गांव में रोजगार खत्म होगा तो किसान कर्ज में डूबेगा और मजदूर पलायन को मजबूर होगा। “यह सरकार योजनाओं को खत्म कर गांवों को खाली करना चाहती है, लेकिन कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। अगर मनरेगा और किसान हितों पर प्रहार बंद नहीं हुआ तो सड़कों से लेकर सदन तक बड़ा आंदोलन होगा।”
जिला अध्यक्ष सतपाल कटारिया ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह सरकार किसान, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक विरोधी सोच से काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा महज जुमला साबित हुआ है, जबकि जमीनी हकीकत में गांव का मजदूर और किसान दोनों परेशान हैं।
पदयात्रा में पूर्व जिला अध्यक्ष हरेंद्र त्यागी, जिला कोऑर्डिनेटर राकेश पुंडीर, सेवादल जिला अध्यक्ष नौशाद अल्वी, महिला जिला अध्यक्ष अफसाना अंसारी समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सभा के अंत में नेताओं ने चेतावनी दी कि “मनरेगा बचाओ संग्राम” अब गांव-गांव तक ले जाया जाएगा और जब तक योजना को पूरी मजबूती से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
