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किसानों की अधूरी लड़ाई को मिलकर लड़ने का आह्वान, स्थापना दिवस पर जुटे हजारों किसान

रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। किसान यूनियन सेवक के स्थापना दिवस पर किसानों का बड़ा जमावड़ा लगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर दीपक सोम के आह्वान पर पहुंचे हजारों किसानों के बीच खेती-किसानी की समस्याओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मंच से किसानों के हक की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। वहीं, इंदौर से पहुंचीं रोहिणी घावरी ने किसान, मजदूर और सफाई कर्मचारियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने की अपील की।

‘किसानों की लड़ाई अभी अधूरी’

स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान यूनियन सेवक के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर दीपक सोम ने कहा कि किसानों की लड़ाई अभी अधूरी है। इसे मिलकर आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल खेती तक सीमित समस्याओं से ही नहीं जूझना पड़ता, बल्कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। किसानों को उनका अधिकार और जरूरी सुविधाएं दिलाना संगठन की प्राथमिकता है। उन्होंने किसानों से एकजुट रहने और अपने हक की लड़ाई मजबूती से लड़ने का आह्वान किया।

किसान-मजदूर और सफाई कर्मचारियों की एकजुटता पर जोर

कार्यक्रम में इंदौर से पहुंचीं रोहिणी घावरी ने किसान, मजदूर और सफाई कर्मचारियों के मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि इन वर्गों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। यदि किसान, मजदूर और सफाई कर्मचारी एकजुट होकर अपनी मांगें उठाएं, तो उनकी आवाज को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने सभी से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और संगठित होकर संघर्ष करने की अपील की।

चंद्रशेखर आजाद पर लगाए गंभीर आरोप

कार्यक्रम के दौरान रोहिणी घावरी ने आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने महिलाओं के शोषण से जुड़े आरोप लगाते हुए उनके संसद में रहने के अधिकार पर सवाल उठाए। साथ ही, इस मामले में भाजपा के संरक्षण का भी आरोप लगाया। हालांकि, कार्यक्रम में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का जवाब सामने आने पर ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

किसान यूनियन सेवक के स्थापना दिवस पर जहां किसानों के हक, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की मांग प्रमुखता से उठी, वहीं किसान-मजदूर एकता का संदेश भी दिया गया। अब इन मुद्दों को लेकर मंच से उठी आवाज को जमीन पर कितना आगे बढ़ाया जाता है, यह संगठन की आगामी गतिविधियों से स्पष्ट होगा।

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