रिपोर्टर: महेंद्र कुमार दुबे ‘बॉबी’
दो दशकों पुराने मामले में जांच एजेंसी को मिली अहम सफलता
फतेहपुर जिले में एक लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी की गिरफ्तारी ने वर्षों पुराने चर्चित मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने विशेष रणनीति अपनाते हुए ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया, जो करीब दो दशकों से अपनी पहचान और पते में बदलाव कर कानून की नजरों से बचता आ रहा था। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के लिए जांच टीम ने राजस्व कर्मियों के रूप में गांव पहुंचकर जमीन की पैमाइश का बहाना बनाया और फिर आरोपी को हिरासत में ले लिया।
वर्ष 2002 की घटना से जुड़ा है मामला
जानकारी के अनुसार यह मामला वर्ष 2002 में शंकरगढ़ स्थित गढ़वा किले में हुई एक बड़ी वारदात से जुड़ा है। उस समय किले से सोने की एक मूल्यवान मूर्ति चोरी होने और वहां तैनात चौकीदार की हत्या किए जाने का मामला दर्ज हुआ था। इस घटना ने उस समय पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बाद में केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई थी।
जांच के दौरान कई आरोपियों के नाम सामने आए, जिनमें रामनरायण और सूरजभान भी शामिल बताए गए। दोनों पर आरोप था कि वे वारदात के बाद लंबे समय तक फरार रहे और न्यायिक प्रक्रिया से बचने की कोशिश करते रहे। जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों कथित रूप से उस समय सक्रिय एक डकैत गिरोह से जुड़े हुए थे।
गलत पता बताकर वर्षों तक बचता रहा आरोपी
जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी रामनरायण अपने वास्तविक निवास की जानकारी छिपाने के लिए अलग थाना क्षेत्र का पता दर्ज कराता रहा। जबकि उसका वास्तविक निवास खखरेरू थाना क्षेत्र के नसीरपुर गांव में बताया जाता है, वह रिकॉर्ड में किशनपुर थाना क्षेत्र का पता दर्शाकर जांच एजेंसियों को भ्रमित करता रहा। इसी वजह से लंबे समय तक उसकी सही लोकेशन का पता लगाना चुनौती बना रहा।
हालांकि, लगातार जुटाई गई सूचनाओं और स्थानीय स्तर पर की गई गोपनीय पड़ताल के बाद सीबीआई को उसके वास्तविक ठिकाने की जानकारी मिल गई। इसके बाद गिरफ्तारी की पूरी योजना बेहद सावधानी के साथ तैयार की गई।
राजस्व कर्मी बनकर पहुंची सीबीआई टीम
सूत्रों के अनुसार सीबीआई की टीम ने गांव में सीधे दबिश देने के बजाय पहले स्थानीय परिस्थितियों का आकलन किया। इसके बाद अधिकारी राजस्व विभाग के कर्मचारियों के रूप में गांव पहुंचे और जमीन की पैमाइश का हवाला देकर आरोपी को बाहर बुलाया। जैसे ही उसकी पहचान की पुष्टि हुई, टीम ने बिना किसी हंगामे के उसे हिरासत में ले लिया।
बताया जा रहा है कि पूरी कार्रवाई बेहद शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और आरोपी को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए रवाना कर दिया गया।
दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी
इस मामले में सीबीआई को इससे पहले भी महत्वपूर्ण सफलता मिल चुकी है। लगभग डेढ़ माह पूर्व दूसरे आरोपी सूरजभान को धाता थाना क्षेत्र के सेमरी गांव से गिरफ्तार किया गया था। दोनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे।
जांच एजेंसी का मानना है कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी से मामले के कई पुराने पहलुओं पर नई जानकारी सामने आ सकती है। साथ ही उस समय की घटनाओं और अन्य संभावित तथ्यों की भी विस्तार से जांच की जाएगी।
न्यायालय के वारंट के बाद तेज हुई कार्रवाई
बताया जा रहा है कि दोनों आरोपी पहले जमानत पर रिहा हुए थे, लेकिन बाद में निर्धारित तिथियों पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। लगातार गैरहाजिर रहने पर अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया और उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए। इसी आदेश के बाद सीबीआई ने उनकी तलाश तेज कर दी थी।
पहले सूरजभान और अब रामनरायण की गिरफ्तारी को इसी कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है। जांच एजेंसी अब दोनों से पूछताछ के आधार पर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
तकनीक और रणनीति से मिली सफलता
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षों पुराने मामलों में आधुनिक तकनीक, खुफिया सूचना और स्थानीय स्तर पर जुटाए गए इनपुट की मदद से अब फरार आरोपियों तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान हुआ है। इस कार्रवाई ने यह भी साबित किया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में समय बीत जाने के बाद भी जांच बंद नहीं होती और कानून अपना काम करता रहता है।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
रामनरायण की गिरफ्तारी के बाद पूरे क्षेत्र में इस कार्रवाई की चर्चा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने वर्षों बाद आरोपी का कानून के शिकंजे में आना यह दर्शाता है कि गंभीर मामलों में जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय रहती हैं।
फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरारी के दौरान उसने किन-किन स्थानों पर निवास किया, किन लोगों के संपर्क में रहा और क्या उसे किसी प्रकार की मदद मिलती रही। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आ सकते हैं।
