रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। आजादी के 78 वर्ष बाद भी अपने अधिकारों से वंचित होने का आरोप लगाते हुए धनगर समाज ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है। धनगर समाज उत्थान समिति (रजि.) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में साफ कहा गया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो समाज सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगा।
समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि संविधान में 1950 से अनुसूचित जाति की सूची में 27वें नंबर पर दर्ज धनगर जाति के लोगों को उत्तर प्रदेश में आज भी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। इसके लिए शासन और प्रशासन की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया कि जनप्रतिनिधि भी इस गंभीर मुद्दे को विधानसभा और लोकसभा में उठाने से बच रहे हैं, जिससे समाज में गहरी नाराजगी है।
विज्ञप्ति में कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति का कहना है कि पुलिस थानों में धनगर समाज के लोगों की सुनवाई नहीं हो रही है और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है। आरोप लगाया गया कि सरकार ने कानून व्यवस्था सुधारने के नाम पर थाना प्रभारियों को मनमानी की खुली छूट दे दी है।
इसके अलावा नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर द्वारा अहिल्याबाई चौक के सौंदर्यीकरण कार्य में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। करीब 39.75 लाख रुपये की लागत से चल रहे इस निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए समिति ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। समिति ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की लैब से कराने का आग्रह किया है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
धनगर समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो समाज चुप नहीं बैठेगा और बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

