रिपोर्ट – शुभम सिंह
बाँदा। जनपद बाँदा में औद्योगिक विकास की गति सुस्त पड़ने और स्थानीय औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के विरोध में ‘जिला औद्योगिक विकास संगठन, बाँदा’ (DIDO) ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के पदाधिकारियों और स्थानीय उद्यमियों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी महोदय बाँदा को ज्ञापन सौंपते हुए क्षेत्र की गंभीर समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण की मांग की है। उद्यमियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा आयोजित ‘उद्योग बंधु’ की बैठकों में जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों का संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा अनुश्रवण एवं क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। इस उपेक्षापूर्ण रवैये से आहत होकर उद्योगपतियों को मजबूरन ज्ञापन के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करानी पड़ रही हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो जिले में कार्यरत उद्योग-धंधे बंद होने की कगार पर पहुँच जाएँगे।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने भूरागढ़ औद्योगिक क्षेत्र और पुलिस लाइन स्थित औद्योगिक आस्थान की ५ प्रमुख समस्याओं को रेखांकित किया है। सबसे पहली मांग निर्बाध विद्युत आपूर्ति की है, क्योंकि अनियमित कटौती के चलते कई इकाइयाँ पूरी तरह ठप हो रही हैं। दूसरी समस्या सुरक्षा और बुनियादी बुनियादी ढांचे से जुड़ी है—भूरागढ़ क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट और पक्की नालियों का अभाव है, चारों तरफ झाड़ियाँ होने तथा पुलिस गश्त न होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था बेहद चिंताजनक है। तीसरी समस्या सड़कों की जर्जर स्थिति, संकीर्णता और जल निकासी न होने से जुड़ी है, जिससे बारिश के दिनों में भारी जलभराव होता है। इसके अतिरिक्त, भूरागढ़ औद्योगिक क्षेत्र के कई भूखंडों से संबंधित फाइलें कानपुर क्षेत्रीय कार्यालय और मुख्य कार्यपालक स्तर पर लंबे समय से लंबित पड़ी हैं, जिससे नए निवेश रुक रहे हैं। वहीं, जल निगम (शहरी व ग्रामीण) द्वारा धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद कई महीनों से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।
संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता एवं महामंत्री सर्वेश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इन सभी माँगों पर समय सीमा के भीतर पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई, तो उद्यमी उत्पादन रोकने और आंदोलन करने पर विवश होंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के संरक्षक संतोष गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सईद अहमद, नागेंद्र सिंह लाला, रामराजा उपाध्याय, आलोक शिवहरे, लल्लू रामवर्मा और आशीष गुप्ता समेत दर्जनों प्रमुख उद्यमी उपस्थित रहे। उद्यमियों का कहना है कि सरकार एक तरफ प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार बढ़ाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की कमी से बुंदेलखंड के उद्योगों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस ज्ञापन के बाद संबंधित विभागों को हरकत में लाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
