रिपोर्टर: श्याम सिंह
श्रावस्ती। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। वायरल वीडियो में एक युवक ने स्थानीय भाजपा विधायक रामफेरन पांडेय पर जमीन कब्जाने का गंभीर आरोप लगाया है। युवक ने वीडियो के माध्यम से जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और दावा किया है कि यदि उसे न्याय नहीं मिला तो वह अपनी मां के साथ आत्महत्या करने के लिए मजबूर होगा।
हालांकि, वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की अभी तक किसी भी सक्षम प्रशासनिक अधिकारी या जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रशासन की ओर से भी इस मामले में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में आरोपों की सत्यता की पुष्टि होना अभी बाकी है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ वीडियो
जानकारी के अनुसार, युवक द्वारा जारी किया गया वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर तेजी से साझा किया जा रहा है। वीडियो में युवक खुद को पीड़ित बताते हुए आरोप लगाता है कि उसकी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया है। उसने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।
वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है और लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
युवक ने न्याय की लगाई गुहार
वीडियो में युवक ने कहा कि यदि उसकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वह गंभीर कदम उठाने के लिए मजबूर होगा। उसने यह भी कहा कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में संबंधित लोग और प्रशासन जिम्मेदार होंगे।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और प्रशासन की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
वीडियो सामने आने के बाद जिले का राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। वहीं कई लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल भाजपा विधायक रामफेरन पांडेय की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं जिला प्रशासन ने भी मामले की जांच या कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
ऐसे में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि फिलहाल वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप केवल संबंधित युवक के दावे हैं। इनकी सत्यता की पुष्टि होना अभी बाकी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी नागरिक ने गंभीर आरोप लगाए हैं तो मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो संबंधित तथ्यों को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।
प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित पक्ष के आधिकारिक बयान के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल जिले में सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
