ब्यूरो रिपोर्ट: कबीर
मुजफ्फरनगर पुलिस ने प्रतिबंधित नशीली दवाइयों के बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा करते हुए करीब एक करोड़ रुपये कीमत की ट्रामाडोल कैप्सूल की खेप बरामद की है। थाना खालापार पुलिस ने “ऑपरेशन सवेरा” के तहत कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से 11 लाख 66 हजार 400 प्रतिबंधित कैप्सूल और एक हुंडई एक्सटर कार बरामद की गई है।
मेडिकल ड्रग्स तस्करी का बड़ा खुलासा
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से प्रतिबंधित मेडिकल ड्रग्स की सप्लाई कर रहा था।
जांच में सामने आया है कि फर्जी फर्म के जरिए पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नशीली कैप्सूल की सप्लाई की जाती थी।
चेकिंग के दौरान पकड़ी गई कार
थाना खालापार प्रभारी निरीक्षक बबलू सिंह वर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम गहरा बाग मार्ग पर संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रही थी।
इसी दौरान एक हुंडई एक्सटर कार को रोककर तलाशी ली गई।
कार में सवार दो युवक पुलिस पूछताछ के दौरान घबरा गए। तलाशी में कार से “स्पासमोर” कंपनी के ट्रामाडोल और डाईक्लोमाइन युक्त कैप्सूल से भरे दो कार्टून बरामद हुए।
दो आरोपी मौके से गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान खतौली निवासी अश्वनी शर्मा और विनोद कुमार के रूप में हुई।
पुलिस के अनुसार अश्वनी शर्मा पहले से एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में वांछित चल रहा था।
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
फर्जी फर्म के जरिए चल रहा था कारोबार
आरोपियों ने बताया कि उन्होंने एक व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर “आरएस इंटरप्राइजेज” नाम से फर्म बनाई थी।
इसी फर्म के नाम पर बिल बनवाकर गोरखपुर निवासी शशांक नामक सप्लायर से प्रतिबंधित दवाइयां मंगाई जाती थीं।
इसके बाद इन कैप्सूलों की विभिन्न जिलों में सप्लाई कर भारी मुनाफा कमाया जाता था।
खंडहरनुमा गोदाम से मिली बड़ी खेप
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि हाल ही में गोरखपुर से नई खेप मंगाकर उसे सुजडू गांव के पास एक खंडहरनुमा गोदाम में छिपाया गया था।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस जब गोदाम पहुंची तो वहां से भागने की कोशिश कर रहे एक युवक को पकड़ लिया गया। उसकी पहचान गांधी कॉलोनी निवासी यशपाल ग्रोवर के रूप में हुई।
गोदाम की तलाशी में तिरपाल से ढंके 52 कार्टून बरामद किए गए। पहले से बरामद दो कार्टून मिलाकर कुल 54 कार्टून में 11.66 लाख से अधिक प्रतिबंधित कैप्सूल बरामद किए गए।
कई राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं तार
पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं है और इसके तार दूसरे जिलों तथा राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।
पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों, बैंक खातों, ट्रांसपोर्ट चैन और सप्लाई सिस्टम की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस टीम को मिला पुरस्कार
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Sanjay Kumar Verma ने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताते हुए पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया है।
पुलिस अब गोरखपुर निवासी कथित सप्लायर शशांक सहित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।
