रिपोर्ट: मनीष शर्मा, बुलंदशहर
स्याना तहसील के तहसीलदार पर बढ़ीं मुश्किलें
बुलंदशहर जनपद की स्याना तहसील में तैनात तहसीलदार मनोज कुमार रावत की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बिना अधिकार और कथित रूप से नियमों के विपरीत दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) करने के मामले में राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश ने गंभीर रुख अपनाया है। मामले में पहले हुई प्रशासनिक जांच के बाद अब उच्च स्तर पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है।
बताया जा रहा है कि इस प्रकरण में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) द्वारा की गई जांच में कथित अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया था। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस प्रशासनिक कार्रवाई के सामने न आने पर मामला राजस्व परिषद तक पहुंच गया।
राजस्व परिषद ने डीएम को भेजा पत्र
मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश की ओर से अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त एवं आईएएस अधिकारी रमेश रंजन ने जिलाधिकारी बुलंदशहर आईएएस कुमार हर्ष को पत्र भेजा है। पत्र में मामले पर आवश्यक कार्रवाई और संबंधित बिंदुओं पर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्व विभाग के स्तर पर इस पत्र को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि मामले की उच्च स्तर पर निगरानी की जा रही है।
दाखिल-खारिज प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाद दाखिल-खारिज (Mutation) की प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप है कि संबंधित प्रकरण में निर्धारित अधिकार क्षेत्र और राजस्व नियमों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद प्रशासनिक जांच कराई गई।
हालांकि, मामले की अंतिम पुष्टि और दोष तय करने का अधिकार सक्षम प्रशासनिक एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आगे की कार्रवाई जांच और विभागीय निर्णय के आधार पर होगी।
एसडीएम जांच के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, एसडीएम स्तर की जांच में संबंधित मामले में अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद अब तक कोई स्पष्ट विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आने से कई सवाल उठ रहे हैं। इसी कारण मामला राजस्व परिषद के संज्ञान में पहुंचा और वहां से जिलाधिकारी को पत्र जारी किया गया।
अब उम्मीद की जा रही है कि जिला प्रशासन इस मामले में उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर जोर
राजस्व मामलों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है। भूमि अभिलेखों और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया सीधे आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ी होती है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जाती है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि सभी मामलों का निस्तारण निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल मामला प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है। जिलाधिकारी कार्यालय को भेजे गए पत्र के बाद संबंधित अभिलेखों और जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया जा सकता है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।
निष्कर्ष
बुलंदशहर की स्याना तहसील में तैनात तहसीलदार मनोज कुमार रावत से जुड़े कथित नियम विरुद्ध दाखिल-खारिज मामले ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। राजस्व परिषद द्वारा जिलाधिकारी को पत्र भेजे जाने के बाद मामले को लेकर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। फिलहाल पूरा मामला जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के अधीन है तथा अंतिम निष्कर्ष संबंधित अधिकारियों की जांच और निर्णय के बाद ही सामने आएगा।
