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रामपुर साइबर सेल की बड़ी सफलता, पीड़ित के खाते में वापस कराए गए 40 हजार रुपये

रिपोर्ट : शारिक खान

रामपुर पुलिस की साइबर सेल ने एक बार फिर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार हुए व्यक्ति को बड़ी राहत दिलाई है। थाना अजीमनगर की साइबर सेल टीम ने तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी में निकाली गई ₹40,000 की पूरी धनराशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराई। पुलिस की इस कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना हो रही है और लोगों का भरोसा साइबर सेल पर और मजबूत हुआ है।

मिली जानकारी के अनुसार आवेदक ने ऑनलाइन साइबर पोर्टल और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन माध्यम से उसके बैंक खाते से ₹40,000 की रकम निकाल ली है। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल थाना अजीमनगर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी।

तकनीकी जांच से साइबर अपराधियों तक पहुंची पुलिस

साइबर अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं और ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों पर नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

पुलिस उपमहानिरीक्षक साइबर क्राइम उत्तर प्रदेश के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक रामपुर सोमेंद्र मीना और अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह के नेतृत्व में साइबर सेल थाना अजीमनगर ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई की।

पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की मदद से आरोपी के खाते की जानकारी जुटाई। इसके बाद संबंधित प्रक्रिया पूरी करते हुए पीड़ित की पूरी रकम वापस उसके खाते में ट्रांसफर कराई गई।

पीड़ित ने जताया पुलिस का आभार

अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर पीड़ित ने रामपुर पुलिस और साइबर सेल टीम का आभार व्यक्त किया। पीड़ित का कहना था कि उसे उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी उसकी रकम वापस मिल जाएगी, लेकिन पुलिस की सक्रियता के कारण उसे राहत मिली।

स्थानीय लोगों ने भी साइबर सेल की इस कार्रवाई की सराहना की है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से आम जनता का पुलिस पर विश्वास मजबूत होता है और साइबर अपराधियों में डर पैदा होता है।

साइबर फ्रॉड से बचने के लिए पुलिस की अपील

रामपुर पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से बचने के लिए सावधानी बरतने की अपील भी की है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और अपनी बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

पुलिस ने लोगों को सलाह दी कि खाता संख्या, एटीएम पिन, ओटीपी, सीवीवी नंबर जैसी जानकारी किसी को भी न दें। इसके अलावा किसी के कहने पर मोबाइल फोन में कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड न करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर लोगों को लालच, डर या फर्जी कॉल के जरिए अपने जाल में फंसाते हैं। इसलिए किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।

साइबर अपराध होने पर तुरंत करें शिकायत

पुलिस ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है तो उसे तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। साइबर फ्रॉड होने पर जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, रकम वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।

लोग ऑनलाइन वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि समय रहते सूचना मिलने पर साइबर अपराधियों के खातों को फ्रीज कर रकम रिकवर की जा सकती है।

साइबर सेल टीम की सराहनीय भूमिका

इस मामले में साइबर सेल थाना अजीमनगर की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में थानाध्यक्ष कर्म सिंह पाल, उपनिरीक्षक अंकित कुमार, कंप्यूटर ऑपरेटर अमरजीत सिंह और कांस्टेबल कुलदीप कुमार शामिल रहे।

पुलिस अधिकारियों ने टीम के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिस लगातार आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है। आने वाले समय में भी साइबर अपराधियों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

लोगों में बढ़ा पुलिस के प्रति विश्वास

रामपुर पुलिस द्वारा पीड़ित की पूरी रकम वापस कराए जाने के बाद आम जनता में सकारात्मक संदेश गया है। लोगों का कहना है कि साइबर अपराध के मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अपराधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

साइबर सेल की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि समय पर शिकायत दर्ज कराई जाए और सतर्कता बरती जाए तो साइबर ठगी से बचाव संभव है।

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