रिपोर्ट: श्रावस्ती संवाददाता
स्थानांतरण नीति के पालन को लेकर चर्चा
श्रावस्ती जिले के कृषि विभाग में स्थानांतरण नीति के अनुपालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि शासन स्तर से स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद कुछ कर्मचारी अभी भी अपने पुराने कार्यस्थल पर कार्य कर रहे हैं। इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
जिला कृषि अधिकारी कार्यालय पर उठे सवाल
जिला कृषि अधिकारी कार्यालय से जुड़ी जानकारी के अनुसार, कुछ कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी उनके पुराने कार्यालय में कार्यरत रहने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा है, तो यह शासन की स्थानांतरण नीति के समयबद्ध अनुपालन को लेकर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सभी सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेशों का समान रूप से पालन होना चाहिए ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
कर्मचारियों को लेकर सामने आई जानकारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्राविधिक सहायक ग्रुप-ए अश्वनी कुमार के स्थानांतरण के बाद भी उनके पुराने कार्यालय में कार्यरत रहने की चर्चा है।
इसी प्रकार प्रधान सहायक राम बाबू सिंह के बारे में भी यह कहा जा रहा है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद वे पुराने पदस्थापन स्थल पर कार्य कर रहे हैं।
इसके अलावा विभागीय वाहन चालक के स्थानांतरण के बाद भी विभागीय वाहन का संचालन किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।
पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रशासन की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेश जारी हो चुके हैं, तो उनका समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहती है और शासन की नीतियों पर लोगों का विश्वास मजबूत होता है।
लोगों का मानना है कि नियम सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच की मांग
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेशों के पालन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि पूरे मामले की वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता बनी रहे।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर जिला प्रशासन और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या कार्रवाई सामने आती है, तो उससे स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
