रिपोर्ट: कबीर, मुजफ्फरनगर
गंगा के पानी का रंग बदलने से बढ़ी चिंता
मुजफ्फरनगर के पौराणिक तीर्थ शुकतीर्थ में गुरुवार सुबह गंगा का पानी काला दिखाई देने और बड़ी संख्या में मछलियों सहित जलीय जीवों के मृत मिलने का दावा किए जाने के बाद साधु-संतों और श्रद्धालुओं में रोष फैल गया। घटना की सूचना स्थानीय पुलिस और प्रशासन को दी गई।
साधु-संतों ने जताई नाराजगी
मां पूर्णागिरि आश्रम के महंत एवं महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल दास महाराज ने गंगा में कथित रूप से दूषित पानी छोड़े जाने पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि समय-समय पर रासायनिक युक्त पानी गंगा में छोड़े जाने से जलीय जीवों को नुकसान पहुंचता है और श्रद्धालुओं की आस्था भी प्रभावित होती है।
उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठाए सवाल
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े रमेश चंद्र वर्मा ने कहा कि वह कई वर्षों से गंगा संरक्षण और जैव विविधता के लिए कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि गंगा में प्रदूषण की घटनाओं से जलीय पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
गंगा सेवा समिति ने जताई चिंता
गंगा सेवा समिति के महामंत्री डॉ. महकार सिंह ने बताया कि समिति के प्रयासों से पूर्व में बड़ी संख्या में मछलियों के बच्चों को गंगा में छोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि यदि प्रदूषित पानी छोड़े जाने की घटनाएं होती हैं, तो इससे जलीय जीवों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
स्थानीय लोगों और साधु-संतों ने गंगा में प्रदूषण के स्रोत की जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से पानी के काला होने या जलीय जीवों की मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।
प्रदूषण के वास्तविक कारणों का पता पानी के नमूनों की जांच और संबंधित विभागों की रिपोर्ट के बाद ही चल सकेगा।
निष्कर्ष
मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में गंगा का पानी काला दिखाई देने और जलीय जीवों की मौत के दावों के बाद साधु-संतों और स्थानीय लोगों ने गहरी चिंता जताई है। मामले की जांच और वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही प्रदूषण के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी का निर्धारण हो सकेगा।
