रिपोर्ट: कबीर
मुजफ्फरनगर। किसानों के लिए सरकारी अनुदान पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया खाद की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ मुजफ्फरनगर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना जानसठ पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त टीम ने गिरोह के मुख्य सप्लायर और मुख्य डिस्ट्रीब्यूटर को गिरफ्तार कर इस बड़े नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिछले छह महीनों के दौरान करीब 15.12 लाख किलोग्राम सब्सिडी युक्त यूरिया की अवैध खरीद-फरोख्त की गई और उसे हरियाणा समेत विभिन्न औद्योगिक इकाइयों तथा फैक्ट्रियों में ऊंचे दामों पर बेचा गया।
पहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
पुलिस के अनुसार एक जून की रात इस गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान पुलिस ने उनके कब्जे से 20.43 हजार किलोग्राम अनुदानित यूरिया, एक कार, एक कैंटर और दो पिकअप वाहन बरामद किए थे।
इस मामले में थाना जानसठ में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आवश्यक वस्तु अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
जांच में खुलती गई नेटवर्क की परतें
गिरफ्तारी के बाद पुलिस लगातार गिरोह की फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की जांच कर रही थी। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं, जिसके आधार पर पुलिस मुख्य आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था और कई स्तरों पर लोगों की भूमिका सामने आ रही है।
मुख्य सप्लायर गिरफ्तार
जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के मुख्य सप्लायर संजय पुत्र स्वर्गीय बचन सिंह निवासी रायसिंह, थाना खानपुर, जनपद हरिद्वार को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह मुजफ्फरनगर के कई लाइसेंसी खाद विक्रेताओं से किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाली यूरिया खरीदकर उसे अवैध रूप से अन्य राज्यों और औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाता था।
मुख्य डिस्ट्रीब्यूटर भी पुलिस के शिकंजे में
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान एक लाइसेंसी खाद दुकान के मुख्य डिस्ट्रीब्यूटर सुन्दर देव कपिल पुत्र श्रीराम सिंह निवासी करहेड़ा, थाना भोपा को भी गिरफ्तार कर लिया।
जांच में उसकी भूमिका भी यूरिया की अवैध आपूर्ति और वितरण में महत्वपूर्ण पाई गई है। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की जानकारी जुटा रही है।
किसानों के हक की खाद की हो रही थी कालाबाजारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह किसानों के लिए सरकारी अनुदान पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया को अवैध तरीके से खरीदकर औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों में अधिक कीमत पर बेच रहा था।
इस अवैध कारोबार से किसानों को नुकसान पहुंच रहा था और कृषि कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली खाद का दुरुपयोग किया जा रहा था।
अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लाइसेंस धारकों, परिवहनकर्ताओं, सप्लायरों और लाभार्थियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति इस अवैध कारोबार में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई का संदेश
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसानों के अधिकारों से जुड़ी सब्सिडी वाली खाद की कालाबाजारी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ है। इसलिए इस गिरोह से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस बड़े खुलासे के बाद खाद की कालाबाजारी में शामिल अन्य लोगों में हड़कंप मचा हुआ है, जबकि पुलिस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है।
