ब्यूरो रिपोर्ट: कबीर | मुजफ्फरनगर
विश्व थायरॉयड दिवस पर आयोजित हुआ जागरूकता सेमिनार
मुजफ्फरनगर के जिला महिला चिकित्सालय में विश्व थायरॉयड दिवस के अवसर पर नवजात शिशुओं में होने वाली गंभीर थायरॉयड बीमारी को लेकर जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म (Congenital Hypothyroidism) की समय पर पहचान और इलाज नहीं किया गया, तो बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
चिकित्सकों ने बताया कि यह बीमारी जन्म के समय ही मौजूद होती है, लेकिन शुरुआती चरण में इसकी पहचान हो जाए तो बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है।
जिला महिला चिकित्सालय में हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम
सोमवार को जिला महिला चिकित्सालय के प्रथम तल स्थित मीटिंग हॉल में “Congenital Hypothyroidism – Early Diagnosis & Management in Newborns” विषय पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. आभा आत्रेय ने की, जबकि संचालन SNCU के नोडल ऑफिसर डॉ. अनुज राजवंशी द्वारा किया गया।
जन्म के बाद शुरुआती जांच बेहद जरूरी
सेमिनार में विशेषज्ञों ने बताया कि नवजात शिशुओं में थायरॉयड हार्मोन की कमी कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए तो बच्चे की बौद्धिक क्षमता, सीखने की क्षमता और शारीरिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
डॉ. अनुज राजवंशी ने कहा कि जन्म के तुरंत बाद की जाने वाली स्क्रीनिंग जांच कई बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर सकती है। उन्होंने कहा कि शुरुआती पहचान और इलाज से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
मानसिक और शारीरिक विकास पर पड़ता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म की अनदेखी बच्चे के मस्तिष्क के विकास पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। इससे बच्चा शारीरिक रूप से कमजोर रह सकता है और उसकी मानसिक क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
डॉक्टरों ने कहा कि कई बार शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए नवजात स्क्रीनिंग बेहद जरूरी हो जाती है। नियमित जांच और समय पर दवा शुरू होने से बच्चे का विकास सामान्य तरीके से हो सकता है।
डॉक्टरों और स्टाफ को दिया गया प्रशिक्षण
कार्यक्रम में चिकित्सकों, स्टाफ नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ को नवजात स्क्रीनिंग, बीमारी की शुरुआती पहचान, उपचार प्रबंधन और जनजागरूकता बढ़ाने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों से कहा कि वे गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के परिजनों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करें ताकि समय रहते जांच कराई जा सके।
कई विशेषज्ञ डॉक्टर रहे मौजूद
सेमिनार में डॉ. फैजल परवेज़, डॉ. राधा चौधरी, डॉ. नीरज, डॉ. संयम, डॉ. भावना और डॉ. स्वाति समेत कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मौजूद डॉक्टरों ने बीमारी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और समय पर इलाज की आवश्यकता पर जोर दिया।
जागरूकता बढ़ाने पर दिया गया जोर
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि नवजात शिशुओं की शुरुआती जांच को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। कई बार जानकारी के अभाव में बीमारी का पता देर से चलता है, जिससे बच्चे के भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की कि नवजात शिशु के जन्म के बाद जरूरी स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं और डॉक्टरों की सलाह को गंभीरता से लें।
सही इलाज से संभव है सामान्य जीवन
डॉक्टरों ने बताया कि जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म गंभीर जरूर है, लेकिन सही समय पर इलाज शुरू होने पर बच्चा पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है। इसलिए शुरुआती जांच और नियमित उपचार इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आने वाले समय में नवजात स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान को और मजबूत किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक बच्चों को समय रहते इलाज मिल सके।
