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किरायेदारी पर डिजिटल पहरा: मुजफ्फरनगर में लॉन्च हुआ QR कोड पोर्टल, अब हर किरायेदार रहेगा प्रशासन की निगरानी में

रिपोर्ट: कबीर

मुजफ्फरनगर में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा किरायेदारों के सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब मकान मालिकों और किरायेदारों को किरायेदारी से संबंधित सूचना देने के लिए सरकारी दफ्तरों और न्यायालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रशासन ने शनिवार को “उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम-2021” के तहत एक आधुनिक “किरायेदारी सूचना पोर्टल” लॉन्च कर दिया है, जिसके जरिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी।

जिला प्रशासन का मानना है कि इस नई डिजिटल व्यवस्था से न केवल किरायेदारों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, बल्कि अपराध नियंत्रण और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने में भी पुलिस और प्रशासन को बड़ी मदद मिलेगी।

जिलाधिकारी ने किया पोर्टल का शुभारंभ

शनिवार को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) गजेन्द्र कुमार ने कैंप कार्यालय में इस पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ किया। अधिकारियों ने बताया कि यह पोर्टल पूरी तरह ऑनलाइन आधारित है और इसे आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

प्रशासन के अनुसार, अब मकान मालिक अपने किरायेदार की जानकारी घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और पारदर्शी बन जाएगी।

अब नहीं लगाने पड़ेंगे सरकारी दफ्तरों के चक्कर

पहले किरायेदार सत्यापन के लिए लोगों को कई बार तहसील, कलेक्ट्रेट या पुलिस कार्यालय जाना पड़ता था। कई मामलों में जानकारी समय पर दर्ज नहीं हो पाती थी, जिससे प्रशासन को कठिनाई होती थी।

लेकिन अब नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद मकान मालिक सीधे पोर्टल पर जाकर आवेदन भर सकेंगे। इससे नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का कहना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर भी काफी हद तक रोक लगेगी।

पोर्टल पर दर्ज करनी होगी पूरी जानकारी

प्रशासन द्वारा विकसित पोर्टल पर मकान मालिक और किरायेदार दोनों की विस्तृत जानकारी दर्ज करनी होगी। आवेदन में किरायेदार का नाम, पता, मोबाइल नंबर, पहचान संबंधी दस्तावेज, मकान का विवरण, किराया राशि, बिजली और पानी का शुल्क, फर्नीचर की जानकारी तथा अनुबंध की अवधि जैसी सूचनाएं शामिल होंगी।

इसके अलावा किरायेदारी से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। इनमें रेंट एग्रीमेंट, आधार कार्ड, पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो और अन्य जरूरी कागजात शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि आवेदन जमा होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा उसकी जांच की जाएगी। सभी जानकारी सही पाए जाने पर डिजिटल प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।

QR कोड से होगा तुरंत सत्यापन

इस नई व्यवस्था की सबसे खास विशेषता QR कोड आधारित डिजिटल सत्यापन प्रणाली है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व न्यायालय की ओर से डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त “किरायेदारी सूचना प्रमाणपत्र” जारी किया जाएगा।

इस प्रमाणपत्र पर एक सुरक्षित QR कोड अंकित होगा। पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी मौके पर ही इस QR कोड को स्कैन करके किरायेदार की पूरी जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे।

प्रशासन का मानना है कि इससे संदिग्ध गतिविधियों पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी और फर्जी पहचान वाले लोगों की पहचान आसान हो जाएगी।

अपराध नियंत्रण में मिलेगी मदद

जिले में लगातार बढ़ती आबादी और बाहरी लोगों के आवागमन को देखते हुए प्रशासन लंबे समय से किरायेदार सत्यापन व्यवस्था को मजबूत बनाने की योजना बना रहा था। कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां बिना सत्यापन के रह रहे लोगों के कारण अपराध की घटनाओं की जांच प्रभावित हुई।

अब डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद पुलिस को किसी भी व्यक्ति की जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे चोरी, धोखाधड़ी, साइबर अपराध और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण पाने में सहायता मिलेगी।

इसके साथ ही शहरों में रह रहे अस्थायी किरायेदारों का डेटा भी सुरक्षित रूप से उपलब्ध रहेगा, जिससे प्रशासनिक निगरानी मजबूत होगी।

आवेदन की लाइव ट्रैकिंग भी होगी

नई व्यवस्था में आवेदन करने वाले लोगों को लाइव ट्रैकिंग की सुविधा भी दी गई है। यानी आवेदन किस चरण में है, उसकी जांच पूरी हुई या नहीं, प्रमाणपत्र जारी हुआ या नहीं — इसकी जानकारी ऑनलाइन ही प्राप्त की जा सकेगी।

इस सुविधा से लोगों को बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी।

मकान मालिकों से प्रशासन की अपील

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने जिले के सभी मकान मालिकों और किरायेदारों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द पोर्टल पर अपनी किरायेदारी की जानकारी दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और व्यवस्थित शहरी व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक का उपयोग कर प्रशासन नागरिक सेवाओं को आसान और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। यह पोर्टल उसी प्रयास का हिस्सा है।

डिजिटल इंडिया अभियान को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की डिजिटल पहल “डिजिटल इंडिया” अभियान को मजबूत करने में भी मदद करेगी। ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार होने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी और नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

मुजफ्फरनगर प्रशासन की यह पहल आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी मॉडल साबित हो सकती है। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो प्रदेश के अन्य शहरों में भी इसी तरह की डिजिटल किरायेदारी प्रणाली लागू की जा सकती है।

नागरिकों को मिलेंगी कई सुविधाएं

नई डिजिटल व्यवस्था से नागरिकों को कई फायदे मिलने वाले हैं। एक ओर जहां मकान मालिकों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, वहीं किरायेदारों को भी अधिक पारदर्शी प्रक्रिया का लाभ मिलेगा।

इसके अलावा दस्तावेजों का ऑनलाइन रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति में भी आसानी होगी। प्रशासन को उम्मीद है कि यह कदम जिले में सुरक्षित और व्यवस्थित शहरी माहौल तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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