Homeउत्तर प्रदेशगोंडा में डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन, पशुपालकों को मिले स्वीकृति प्रमाण पत्र...

गोंडा में डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन, पशुपालकों को मिले स्वीकृति प्रमाण पत्र और डेमो चेक

रिपोर्टर: इंद्रेश कुमार श्रीवास्तव

डेयरी विकास को बढ़ावा देने के लिए आयोजित हुआ जनपद स्तरीय सम्मेलन

गोंडा जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला पंचायत सभागार में जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने की। सम्मेलन में बड़ी संख्या में पशुपालकों, किसानों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने कहा कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया जोर

सम्मेलन को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि डेयरी व्यवसाय किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और पात्र लाभार्थियों तक उनका लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जाए।

उन्होंने कहा कि योजनाओं का सफल क्रियान्वयन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।

लाभार्थियों को मिले स्वीकृति प्रमाण पत्र और डेमो चेक

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत चयनित 28 लाभार्थियों को स्वीकृति प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इसके अलावा सात लाभार्थियों को 80-80 हजार रुपये के डेमो चेक प्रदान किए गए।

वहीं, नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत संचालित मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना में चयनित तीन लाभार्थियों को प्रति लाभार्थी 5 लाख 90 हजार रुपये के डेमो चेक दिए गए।

इस अवसर पर लाभार्थियों ने सरकार और दुग्ध विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं से डेयरी व्यवसाय का विस्तार करने में मदद मिलेगी और आय बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे।

योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

कॉन्क्लेव में उपस्थित किसानों और पशुपालकों को दुग्ध विभाग की विभिन्न योजनाओं, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और मिलने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि सरकार का उद्देश्य आधुनिक डेयरी प्रणाली को बढ़ावा देना, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

साथ ही प्रतिभागियों को वैज्ञानिक पशुपालन, बेहतर नस्लों के संरक्षण, संतुलित पशु आहार और आधुनिक डेयरी प्रबंधन के महत्व से भी अवगत कराया गया।

डेयरी व्यवसाय को बताया आय का बेहतर माध्यम

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि पशुपालक आधुनिक तकनीकों को अपनाते हैं और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाते हैं, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है। इससे न केवल दूध उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की आमदनी में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

उन्होंने पशुपालकों को पशुओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और स्वच्छ डेयरी प्रबंधन अपनाने की भी सलाह दी।

बड़ी संख्या में पहुंचे किसान और पशुपालक

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ, पशुपालन विभाग के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक मौजूद रहे। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर योजनाओं और डेयरी व्यवसाय से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम का संचालन अंजनि कुमार दूबे ने किया।

निष्कर्ष

गोंडा में आयोजित जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव पशुपालकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। सम्मेलन के माध्यम से लाभार्थियों को आर्थिक सहायता के प्रतीक स्वरूप स्वीकृति प्रमाण पत्र और डेमो चेक वितरित किए गए, वहीं आधुनिक डेयरी प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी साझा की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पशुपालक वैज्ञानिक तरीकों और सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग करें, तो डेयरी व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन सकता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments