रिपोर्ट: कबीर
मुजफ्फरनगर
मुजफ्फरनगर के पौराणिक तीर्थ स्थल शुकतीर्थ (शुक्रताल) में गंगा नदी के कथित रूप से दूषित और काले पानी को लेकर विरोध तेज हो गया है। संत समाज द्वारा विरोध दर्ज कराने के बाद अब भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने भी इस मुद्दे पर आंदोलन शुरू कर दिया है। रविवार को भाकियू कार्यकर्ताओं ने मोरना ब्लॉक अध्यक्ष अनुज राठी के नेतृत्व में गंगा घाट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करते हुए गंगा में स्वच्छ और अविरल जल प्रवाह सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
गंगा घाट पर शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना
भाकियू के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गंगा घाट पर धरना देते हुए कहा कि जब तक गंगा में स्वच्छ जल प्रवाहित नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरने के दौरान किसानों ने गंगा की स्वच्छता और प्रदूषण रोकने को लेकर प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
संगठन का कहना है कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसकी स्वच्छता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
प्रदूषण को लेकर जताई चिंता
धरने के दौरान भाकियू नेताओं ने आरोप लगाया कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला कथित दूषित पानी गंगा नदी को प्रदूषित कर रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसका असर पर्यावरण के साथ-साथ जनस्वास्थ्य और धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ेगा।
किसानों ने संबंधित विभागों से प्रदूषण के स्रोतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
संत समाज भी जता चुका है विरोध
इससे पहले शुकतीर्थ के संत समाज ने भी गंगा के पानी की स्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। संतों ने चिंता जताई थी कि नदी के प्रदूषण से जलीय जीवों और नदी के प्राकृतिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने भी गंगा की स्वच्छता बनाए रखने और प्रदूषण रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की थी।
प्रशासन और संबंधित विभागों के खिलाफ नारेबाजी
धरने के दौरान भाकियू कार्यकर्ताओं ने प्रशासन और संबंधित विभागों के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने मांग की कि गंगा में स्वच्छ जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाए, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की जांच की जाए और यदि किसी इकाई द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
धरने में मोरना ब्लॉक अध्यक्ष अनुज राठी के नेतृत्व में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी, स्थानीय किसान और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में गंगा की स्वच्छता बनाए रखने और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
भाकियू नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि गंगा की स्वच्छता केवल धार्मिक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
शुकतीर्थ में गंगा के पानी को लेकर उठे इस आंदोलन ने पर्यावरण संरक्षण और नदी प्रदूषण के मुद्दे को फिर से प्रमुखता से सामने ला दिया है। संत समाज के बाद अब भारतीय किसान यूनियन के धरने से इस मुद्दे ने और गंभीर रूप ले लिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
