ग्राम पंचायत मुरवल के छह विद्यालयों में वित्तीय अनियमितताओं का मामला चर्चा में
रिपोर्ट: शुभम सिंह, बांदा
बांदा जिले में मिड-डे मील और छात्रवृत्ति योजना से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत मुरवल के छह सरकारी विद्यालयों में बच्चों के लिए संचालित योजनाओं में लाखों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर नैतिक पार्टी के युवा प्रदेश अध्यक्ष यशवंत सिंह खंगार ने जिलाधिकारी से शिकायत कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
मिड-डे मील और छात्रवृत्ति में अनियमितता का आरोप
शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत मुरवल के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में मिड-डे मील योजना और छात्रवृत्ति मद में धनराशि के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
आरोप है कि मिड-डे मील योजना में ₹9,75,331 तथा छात्रवृत्ति योजना में ₹2,33,345 की वित्तीय गड़बड़ी हुई है। इस प्रकार कुल मिलाकर 12 लाख रुपये से अधिक की कथित अनियमितता का मामला सामने आया है।
पूर्व प्रधान और अन्य अधिकारियों पर आरोप
मामले में पूर्व ग्राम प्रधान रामबाबू निषाद और गीता देवी पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के लिए निर्धारित धनराशि का सही उपयोग नहीं किया गया और योजनाओं में गड़बड़ियां की गईं।
हालांकि आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जांच रिपोर्ट का हवाला
शिकायत में कहा गया है कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कराई गई जांच में कई बिंदुओं पर अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जांच आख्या में ग्राम प्रधान, सचिव और ग्राम विकास अधिकारी को दोषी पाया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर इस रिपोर्ट की समीक्षा किए जाने की मांग भी की गई है।
जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग
नैतिक पार्टी के युवा प्रदेश अध्यक्ष यशवंत सिंह खंगार ने जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद बच्चों को लाभ पहुंचाना है, इसलिए यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप
शिकायत पत्र में पूर्व प्रधान रामबाबू निषाद के संबंध में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित मामलों पर अंतिम स्थिति जांच एवं कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामला सामने आने के बाद अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह शिक्षा और छात्र कल्याण योजनाओं से जुड़ा एक गंभीर मामला माना जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मामले की जांच और उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बच्चों के अधिकारों से जुड़ा मामला
स्थानीय लोगों का कहना है कि मिड-डे मील और छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं सीधे बच्चों के हितों से जुड़ी होती हैं। इसलिए इन योजनाओं में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता अत्यंत गंभीर विषय है।
फिलहाल शिकायत के आधार पर मामला चर्चा में है और प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
