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75 साल पुरानी पांडुलिपियों की खोज में जुटी टीम, घरों और मंदिरों में छिपे इतिहास को मिलेगा नया जीवन

रिपोर्ट: कबीर

मो.: 9389289821

मुज़फ्फरनगर में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने की दिशा में बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत जिले में 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों, ताड़पत्रों और दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेजों की खोज तेज कर दी गई है।

इस अभियान के तहत ऐसे धार्मिक स्थलों, मंदिरों, निजी पुस्तकालयों और परिवारों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां वर्षों पुरानी हस्तलिखित धरोहरें आज भी सुरक्षित रखी हुई हैं। प्रशासन और सर्वेक्षण टीम का उद्देश्य इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।

धार्मिक स्थलों और निजी संग्रहों में चल रहा सर्वे

ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान में समिति सदस्य डॉ. राजीव कुमार लगातार जिले के विभिन्न ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का दौरा कर रहे हैं।

इसी क्रम में श्री 1008 दिगम्बर जैन मंदिर और श्री दिगम्बर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र सहित कई स्थानों पर संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों और प्राचीन ग्रंथों का चिन्हीकरण किया जा चुका है।

टीम निजी संग्रहकर्ताओं से भी संपर्क कर रही है ताकि घरों में रखी पुरानी पांडुलिपियों और अभिलेखों की जानकारी जुटाई जा सके।

भारत की ज्ञान परंपरा को बचाने की पहल

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा विभिन्न पांडुलिपियों में संरक्षित है। इनमें दर्शन, वेद, आयुर्वेद, गणित, विज्ञान, साहित्य, ज्योतिष, वास्तु, संगीत और संस्कृति से जुड़ा अमूल्य ज्ञान दर्ज है।

बताया जा रहा है कि देशभर में लगभग एक करोड़ प्राचीन पांडुलिपियां मौजूद हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अब तक अप्रकाशित है। कई दस्तावेज समय, मौसम और उचित संरक्षण के अभाव में खराब हो रहे हैं। ऐसे में यह मिशन इन अमूल्य धरोहरों को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डिजिटलीकरण के जरिए दुनिया तक पहुंचेगा ज्ञान

ज्ञान भारतम् मिशन के तहत केवल पांडुलिपियों की खोज ही नहीं, बल्कि उनका सूचीकरण, डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक संरक्षण भी किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से इन दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित कर वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और इतिहासकारों को भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन करने में बड़ी मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन की विस्तारित कड़ी

जानकारी के अनुसार यह मिशन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा वर्ष 2003 में शुरू किए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन की विस्तारित कड़ी माना जा रहा है।

केंद्र सरकार द्वारा बजट 2025-26 में घोषित ज्ञान भारतम् मिशन को भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

लोगों से सहयोग की अपील

प्रशासन और सर्वेक्षण टीम ने जनपदवासियों से अपील की है कि यदि उनके पास 75 वर्ष से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि, ताम्रपत्र, ताड़पत्र या अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हों तो उसकी जानकारी साझा करें।

अधिकारियों का कहना है कि लोगों के सहयोग से इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सकेगा।

इतिहास को नया जीवन देने की तैयारी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल पुराने दस्तावेजों को बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

मुज़फ्फरनगर में शुरू हुआ यह सर्वे अभियान अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में कई दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज सामने आ सकते हैं।

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