रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। राशन विक्रेताओं ने लाभांश का बकाया भुगतान कराने, मानदेय तय करने और हर महीने निश्चित भाड़ा देने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। सोमवार को उत्तर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के तत्वावधान में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में कोटेदारों की आर्थिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार मल्होत्रा ने कहा कि राशन वितरण की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद विक्रेताओं को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है। इससे उनके सामने परिवार का खर्च चलाने और बच्चों की फीस जमा करने तक की परेशानी खड़ी हो रही है।
बैठक में प्रदेश, मंडल और जिला स्तर के पदाधिकारियों के साथ सहारनपुर, शामली, बघरा, खतौली, बुढ़ाना, चरथावल और पुरकाजी समेत विभिन्न क्षेत्रों से आए राशन विक्रेता शामिल हुए। संगठन ने सरकार से मांग की कि कोटेदारों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें आर्थिक राहत दी जाए।
बढ़े हुए लाभांश का भुगतान नहीं होने पर नाराजगी
प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार मल्होत्रा ने कहा कि राशन विक्रेताओं की प्रमुख समस्याओं में लाभांश का समय से भुगतान नहीं होना और मानदेय की व्यवस्था न होना शामिल है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से 17 जुलाई को लाभांश में 125 रुपये की वृद्धि की घोषणा की गई थी। संगठन के मुताबिक, जुलाई से लागू बताई गई इस वृद्धि के बावजूद अगस्त और सितंबर का बढ़ा हुआ लाभांश अब तक विक्रेताओं को नहीं मिला है। उन्होंने लंबित भुगतान जल्द कराने की मांग उठाई।
मल्होत्रा ने कहा कि राशन विक्रेता सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र लोगों तक राशन पहुंचाने का काम करते हैं। इसके बावजूद उन्हें अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रत्येक माह निश्चित भाड़ा देने, लाभांश का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने और राशन विक्रेताओं के लिए उचित मानदेय तय करने की मांग की।
उन्होंने बताया कि अधिकारियों के साथ वार्ता के बाद लाभांश का पूरा सीजरा तीन दिन के भीतर तैयार कर एसआरओ कार्यालय भेजने के निर्देश दिए जाने की जानकारी मिली है। निर्धारित प्रक्रिया में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई है।
बिना जांच सभी को गलत मानना उचित नहीं : सुंदर सिंह सोम
परिषद के नगर अध्यक्ष ठाकुर सुंदर सिंह सोम ने कहा कि राशन विक्रेताओं को अक्सर संदेह की नजर से देखा जाता है, जबकि वे सरकारी राशन वितरण व्यवस्था को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि किसी विक्रेता की आय, बैंक खाते या संपत्ति को लेकर संदेह है तो सरकार निष्पक्ष जांच करा सकती है।
उन्होंने कहा कि जांच में किसी विक्रेता के खिलाफ अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना जांच सभी राशन विक्रेताओं को गलत मानना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सीमित आमदनी में परिवार का खर्च उठाना, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जिम्मेदारियां पूरी करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में सरकार को उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
संगठन ने एकजुट होकर मांगें उठाने पर दिया जोर
प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज दूबे, प्रदेश प्रभारी एवं मंडल अध्यक्ष राजपाल और प्रदेश सचिव राजेंद्र भगत ने राशन विक्रेताओं की समस्याओं के समाधान के लिए संगठनात्मक एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लाभांश, मानदेय और वितरण व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को शासन और विभागीय अधिकारियों के सामने प्रभावी ढंग से उठाया जाना चाहिए।
प्रदेश मीडिया प्रभारी मुस्तकीम मलिक ने भी विक्रेताओं की समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। बैठक में जिला अध्यक्ष हुकुमचंद अंसारी समेत विभिन्न क्षेत्रों के पदाधिकारियों और विक्रेता प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।
बैठक के अंत में राशन विक्रेताओं के लंबित लाभांश का भुगतान, मानदेय तय करने, निश्चित भाड़ा देने और उनकी समस्याओं का निष्पक्ष समाधान कराने की मांग दोहराई गई। संगठन ने उम्मीद जताई कि शासन और संबंधित विभाग इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
