रिपोर्टर: कबीर
फर्जी डिग्री नेटवर्क पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
मुजफ्फरनगर में थाना छपार पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त टीम ने फर्जी मेडिकल डिग्री तैयार करने वाले कथित गिरोह का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में 15 हजार रुपये का इनामी वांछित भी शामिल है। पुलिस के अनुसार गिरोह बीएएमएस, बी-फार्मा और डी-फार्मा जैसी डिग्रियां दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करता था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल एक व्यक्ति बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के हरिद्वार में अस्पताल संचालित कर रहा था। मामले में पुलिस ने विभिन्न साक्ष्य बरामद कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार पूरे मामले की जांच आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायत के आधार पर शुरू की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इमलाख उर्फ इमलाक ने फर्जी मेडिकल डिग्री बनवाने का भरोसा देकर उससे धनराशि ली और उसके मूल शैक्षणिक दस्तावेज अपने पास रख लिए।
प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद थाना छपार में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी पर 15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था।
घेराबंदी कर तीन आरोपियों को पकड़ा
गोपनीय सूचना मिलने पर थाना छपार पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने ताजपुर रजवाहा स्थित बरला-बसेड़ा रोड पर घेराबंदी कर कार्रवाई की। इस दौरान इमलाख उर्फ इमलाक, वी.के. गौतम और मंसूर उलहक को गिरफ्तार कर लिया गया।
तलाशी के दौरान पुलिस ने 32 विजिटिंग कार्ड, छह खाली लेटरहेड, चार भरे हुए लेटरहेड, मेडिकल अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के कवर, मरीजों से संबंधित बुकलेट, तीन मोबाइल फोन और एक कार बरामद की। पुलिस ने सभी सामान को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
पूछताछ में हुए कई अहम खुलासे
पुलिस के अनुसार पूछताछ में मुख्य आरोपी इमलाख ने स्वीकार किया कि वह स्वयं को एक फार्मेसी संस्थान का चेयरमैन और डायरेक्टर बताकर लोगों को बीएएमएस, बी-फार्मा और डी-फार्मा जैसी डिग्रियां दिलाने का झांसा देता था। इसके बदले वह लाखों रुपये वसूलता था।
आरोपी ने यह भी बताया कि इस प्रकार के एक मामले में उत्तराखंड एसटीएफ पहले भी उसे गिरफ्तार कर चुकी है और वह लगभग दो वर्ष तक जेल में रह चुका है।
बिना वैध डिग्री के अस्पताल संचालन का आरोप
जांच के दौरान गिरफ्तार वी.के. गौतम ने पुलिस को बताया कि उसके पास कोई वैध मेडिकल डिग्री नहीं है। इसके बावजूद वह हरिद्वार में अस्पताल संचालित कर रहा था।
पुलिस के अनुसार उसने कथित रूप से बीएएमएस की डिग्री प्राप्त करने के लिए इमलाख को छह लाख रुपये दिए थे, लेकिन उसे डिग्री नहीं मिली। वहीं तीसरे आरोपी मंसूर उलहक ने पूछताछ में बताया कि उसने गौतम से धनराशि लेकर अपना कमीशन रखने के बाद शेष रकम मुख्य आरोपी को दे दी थी।
पुलिस का कहना है कि तीनों इसी लेन-देन से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए मिले थे, तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरोह के नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी डिग्री तैयार करने का यह नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला हुआ था और इसके माध्यम से कितने लोगों को कथित रूप से ठगा गया। बरामद मोबाइल फोन, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की तकनीकी जांच कराई जा रही है।
जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी पर पहले से दर्ज हैं कई मुकदमे
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी इमलाख के खिलाफ पहले से हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी, जालसाजी, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। उसके आपराधिक इतिहास की भी विस्तृत जांच की जा रही है।
निष्कर्ष
मुजफ्फरनगर में फर्जी मेडिकल डिग्री तैयार करने के कथित नेटवर्क का खुलासा पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ कई दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद हुई है। पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और चल रही विवेचना के आधार पर होगी।
