रिपोर्ट – कबीर
मुज़फ्फरनगर,मोरना। ग्रामीण क्षेत्रों में सदियों से गन्ने की पेराई कर गुड़ बनाने के लिए संचालित होने वाले देसी कोल्हू अब नई तकनीक के साथ बदलाव की ओर बढ़ रहे हैं। महंगे डीजल, बढ़ते बिजली बिल और उपकरणों के रखरखाव की समस्या के बीच भोकरहेड़ी के एक वेल्डिंग मिस्त्री ने कोल्हू की पेराई मशीन को कम क्षमता वाली मोटर से सीधे जोड़ने की तकनीक तैयार की है। तकनीक विकसित करने वाले साजिद अंसारी का दावा है कि इससे बिजली की खपत में करीब 75 प्रतिशत तक बचत हो सकती है और पूरे सीजन में कोल्हू संचालकों को लाखों रुपये की बचत होगी।
मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित कस्बा भोकरहेड़ी गुड़ उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहां सैकड़ों की संख्या में गन्ना कोल्हू संचालित होते हैं, जिनसे प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गुड़ का उत्पादन होता है और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। कस्बे के लक्सर मार्ग पर भी दर्जनों कोल्हू संचालित किए जाते हैं।
कस्बा निवासी साजिद अंसारी वेल्डिंग का काम करते हैं। उनके तहेरे भाई नाजिम अंसारी लक्सर मार्ग पर गन्ना कोल्हू संचालित करते हैं। कोल्हू में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की संख्या कम करने और ऊर्जा की बचत के उद्देश्य से साजिद अंसारी कई वर्षों से नई तकनीक पर काम कर रहे थे। मेहनत के बाद तैयार की गई तकनीक अब कोल्हू संचालकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
साजिद अंसारी के अनुसार, नई तकनीक में 7.5 हॉर्स पावर की विद्युत मोटर को गियर बॉक्स के माध्यम से सीधे पेराई मशीन से जोड़ा गया है। जबकि पारंपरिक व्यवस्था में करीब 15 हॉर्स पावर की मोटर को बड़े शाफ्ट से जोड़कर पट्टे के माध्यम से पेराई मशीन संचालित की जाती है। नई व्यवस्था में शाफ्ट और पट्टे की आवश्यकता नही है।
उनका दावा है कि मोटर की क्षमता आधी होने से बिजली का भार भी काफी कम होगा। उनके अनुसार, जहां पहले करीब 40 हजार रुपये मासिक बिजली बिल आता था, वह नई तकनीक से लगभग 12 हजार रुपये तक रह सकता है। इसके अलावा पट्टों की लागत से बचत, पट्टा की चपेट से होने वाले हादसों का खतरा कम होना तथा बारिश के दौरान भी कोल्हू संचालन में सुविधा जैसे फायदे होने का दावा किया गया है।
साजिद अंसारी ने बताया कि नई तकनीक को तैयार करने में करीब 80 हजार रुपये की लागत आई है। भविष्य में मोटर को सौर ऊर्जा से संचालित करने की योजना है। उनका कहना है कि बिजली और पैसे की बचत के साथ सुरक्षा, कार्य समय में बढ़ोतरी तथा पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए तकनीक को और विकसित किया जाएगा।
नई तकनीक को लेकर क्षेत्र के कोल्हू संचालकों में उत्साह दिखाई बना हुआ है। संचालकों के अनुसार, आगामी एक सप्ताह में क्षेत्र में गन्ना कोल्हुओं का संचालन शुरू हो जाएगा। ऐसे में यदि नई तकनीक के दावे व्यावहारिक रूप से सफल साबित होते हैं तो यह गुड़ उद्योग से जुड़े ग्रामीणों के लिए ऊर्जा खर्च कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।
