हजारों जायरीन की अकीदत से रूहानी हुआ देवा का माहौल, सूफी परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब के रंग में रंगा चादरपोशी का आयोजन
रिपोर्ट – संदीप वर्मा
बाराबंकी। बाराबंकी में विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हज़रत हाजी वारिस अली शाह की सरजमीं देवा में गुरुवार की शाम अकीदत, रूहानियत और आपसी सौहार्द का अनुपम संगम देखने को मिला। देवा मेला एवं प्रदर्शनी समिति के तत्वावधान में सूफी संत हज़रत हाजी वारिस अली शाह तथा उनके वालिद सैयद कुर्बान अली शाह की मजार पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ चादरपोशी की गई।
जिलाधिकारी एवं देवा मेला एवं प्रदर्शनी समिति के अध्यक्ष ईशान प्रताप सिंह तथा अपर जिलाधिकारी एवं मेला समिति के सचिव निरंकार सिंह की अगुवाई में पीएसी बैंड की सुमधुर धुनों और गाजे-बाजे के साथ चादर जुलूस निकाला गया। जुलूस में हजारों जायरीन ने शामिल होकर अपनी अटूट अकीदत और श्रद्धा अर्पित की।
जुलूस सर्वप्रथम सैयद कुर्बान अली शाह की मजार पर पहुंचा, जहां पूरे अदब और एहतराम के साथ चादर अर्पित की गई। इसके उपरांत जुलूस हज़रत हाजी वारिस अली शाह की मजार पर पहुंचा, जहां चादरपोशी कर अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे की दुआ मांगी गई।
चादरपोशी के इस पारंपरिक आयोजन में उमड़े जायरीन के हुजूम ने देवा की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक समरसता की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की। बैंड की गूंजती धुनों, श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और सूफियाना माहौल ने आयोजन को भावपूर्ण एवं यादगार बना दिया।
यह आयोजन एक बार फिर प्रेम, सद्भाव, इंसानियत और गंगा-जमुनी तहजीब के उस शाश्वत संदेश को रेखांकित करता नजर आया, जो देवा की विशिष्ट पहचान और सूफी संत हज़रत हाजी वारिस अली शाह की शिक्षाओं का मूल आधार है।
