Homeउत्तर प्रदेश'क्या पता जिंदगी दोबारा मौका देगी या नहीं...' बाढ़ में घर कटा...

‘क्या पता जिंदगी दोबारा मौका देगी या नहीं…’ बाढ़ में घर कटा तो रो पड़ी महिला

रिपोर्ट – संदीप वर्मा

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के जनपद बाराबंकी के हेतमापुर गांव में सरयू नदी की तेज कटान ने कई परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए हैं. पति को पहले ही खो चुकीं मोहसिना का घर नदी की कटान में चला गया, जबकि सितारा अपने मकान का आधा हिस्सा नदी में समाते देख चुकी हैं. अब दोनों को प्रशासन से जमीन और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नए घर की उम्मीद है.
बाराबंकी के गांव में सरयू नदी की कटान जारी…
यूपी के बाराबंकी में सरयू नदी की कटान सिर्फ जमीन और मकान नहीं काट रही, यह लोगों के सपनों, उनकी मेहनत और पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी को भी अपने साथ बहा ले जा रही है. हेतमापुर गांव में सरयू नदी की तेज कटान ने कई परिवारों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. किसी का घर नदी में समा चुका है तो किसी का मकान धीरे-धीरे कटान की चपेट में है. इन्हीं परिवारों में दो महिलाएं हैं- मोहसिना और सितारा. दोनों की आंखों में आंसू हैं. दोनों के सामने अपने घर उजड़ने का दर्द है. लेकिन दोनों की कहानी अलग-अलग होते हुए भी एक ही सवाल पर आकर रुकती है- अब आगे क्या होगा?

मोहसिना की जिंदगी का दर्द शायद कुछ शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. वह बताती हैं कि उनके पति का पहले ही इंतकाल हो चुका है. पति के जाने के बाद उनके सामने परिवार की जिम्मेदारी थी. किसी तरह जिंदगी आगे बढ़ रही थी. परिवार में उनका एक बच्चा है. जिंदगी मुश्किल थी, लेकिन सिर पर एक छत थी. एक घर था, जिसे वह अपना कह सकती थीं. फिर सरयू नदी की कटान ने वह घर भी छीन लिया. नदी के बढ़ते कटाव की चपेट में उनका आशियाना उजड़ गया.

मोहसिना अपने घर की बात करती हैं तो उनकी आंखें भर आती हैं. आंसू पोछते हुए वह ज्यादा कुछ नहीं कह पातीं. शायद कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जिन्हें शब्दों में कहना आसान नहीं होता. पति पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे. अब घर भी नहीं बचा. मोहसिना के पास अब उम्मीद का एक ही सहारा है- सरकार और प्रशासन. उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन उन्हें पट्टे पर जमीन उपलब्ध कराएगा और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत एक घर मिल सकेगा.

‘जैसे-जैसे मकान कटता है, हमारा कलेजा फटता है’

मोहसिना की तरह ही सितारा भी सरयू नदी की कटान का दर्द झेल रही हैं. उनका घर भी नदी की जद में आ चुका है. सितारा कहती हैं कि जैसे-जैसे सरयू नदी हमारा मकान काटती है, हमारा कलेजा फटता है. बड़ी मेहनत से घर बनाया था… अब पता नहीं जिंदगी दोबारा ऐसा मौका देगी या नहीं. यह वो दर्द है, जिसमें कोई इंसान अपनी आंखों के सामने अपनी जिंदगी की मेहनत को खत्म होते देख रहा है.

सितारा के मकान का आधा हिस्सा सरयू नदी में समा चुका है. परिवार ने घर के कुछ हिस्से को खुद तोड़कर बचाने की कोशिश भी की. शायद जो बचाया जा सके, उसे बचा लिया जाए. लेकिन नदी की कटान इतनी तेज थी कि इससे पहले ही मकान का एक बड़ा हिस्सा नदी अपने साथ ले चुकी थी.

सितारा के लिए परेशानी सिर्फ मकान तक सीमित नहीं है. वह बताती हैं कि घर-बार के साथ खेत और फसल भी बाढ़ और कटान की चपेट में हैं. यानी जिस घर में रहना था, वह भी खतरे में. और जिस जमीन से जीवन चलना था, वह भी संकट में. आंखों में आंसू लिए सितारा अपने उजड़ते आशियाने को देखती हैं. उनके सामने सबसे बड़ा सवाल है कि जिस घर को बड़ी मेहनत से बनाया था, क्या जिंदगी उन्हें दोबारा वैसा घर बनाने का मौका देगी?

हेतमापुर गांव में यह कहानी सिर्फ दो महिलाओं तक सीमित नहीं है. सरयू नदी की कटान से कई परिवार प्रभावित हैं. किसी का मकान पूरी तरह नदी में समा चुका है. किसी के घर का एक हिस्सा कट चुका है. कई लोग इस डर में हैं कि पता नहीं अगला नंबर किसके घर का होगा. प्रभावित परिवारों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती घर बचाने से ज्यादा दोबारा जिंदगी बसाने की है. घर उजड़ने के बाद लोगों को रहने की जगह चाहिए. जिनकी जमीन और फसल प्रभावित हुई है, उन्हें अपने भविष्य की चिंता है. और जिन परिवारों ने अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर घर बनाया था, उनके सामने फिर से शुरुआत करने का सवाल है.

प्रशासन ने क्या भरोसा दिया?

बाराबंकी के जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने बाढ़ पीड़ितों और सरयू नदी की कटान में मकान गंवाने वाले परिवारों को मदद का भरोसा दिया है. प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को पट्टे पर जमीन उपलब्ध कराने की बात कही गई है. इसके साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिलाने का भरोसा भी दिया गया है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments