रिपोर्ट – कबीर
मुज़फ्फरनगर मोरना। तीर्थनगरी शुकतीर्थ स्थित श्रीकृष्ण धाम में श्रीराधारानी जन्म महामहोत्सव धूमधाम से मनाया गया।कार्यक्रम में सुंदर भजन प्रस्तुत किये गए। वहीं उपस्थित साधु संतों ने आशीर्वचन किये।
प्रयागराज से आए कथावाचक सर्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि युवा पीढ़ी को परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारियों का ज्ञान देना जरूरी है। माता-पिता बच्चों को समय दें, उनकी बातें सुनें और सनातन संस्कृति का ज्ञान देकर सँस्कार प्रदान करें
रामानुज कोट आश्रम के स्वामी विष्णु आचार्य ने कहा कि भगवान कृष्ण की भक्ति राधा रानी की पूजा के बिना अधूरी है।
महामंडलेश्वर गोपालदास महाराज ने कहा कि बच्चों को केवल धन और सुविधाओं की विरासत देने के बजाय संस्कारों की पूंजी देना अधिक महत्वपूर्ण है। संस्कारवान पीढ़ी ही समाज को सही दिशा दे सकती है।
परमाध्यक्ष आचार्य इंद्रपाल सिंह ने कहा कि समाज में बदलाव की शुरुआत परिवार से होती है। बच्चों को बुराइयों से दूर रखने के लिए माता-पिता को उनके साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए। बीके प्रवेश दीदी ने कहा कि योग साधना के द्वारा परम् भक्ति को प्राप्त किया जा सकता है।ध्यान के द्वारा मन का परम् आत्मा से मिलन होता है।राधा प्रेम परम् भक्ति है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से स्वामी गीतांनन्द तीर्थ ,स्वामी परमेश्वर महाराज, स्वामी आनंद स्वरूपानंद महाराज, आचार्य ध्रुव दत्त शुक्ल, मेटी के अध्यक्ष संजय राठी और आचार्य प्रेमशंकर मिश्र ने भी विचार व्यक्त किए।
पूजन-अभिषेक और महायज्ञ के बाद भंडारा
श्रीराधारानी जन्म महामहोत्सव पर पंचोपचार पूजन, अभिषेक और श्रीसूक्त महायज्ञ हुआ। आरती के बाद भगवान को भोग अर्पित किया गया। महाआरती के बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें दूरदराज से आए साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में मुख्य यजमान शिवनारायण, उनकी पत्नी सुशीला देवी और जगदीश माथुर मौजूद रहे।
