किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह की अगुवाई में जीआईसी मैदान में जुटे किसान, गन्ना भुगतान से कर्जमाफी तक उठीं मांगें
रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। आसमान से बरसती बारिश, मैदान में जलभराव और तेज हवा से बिगड़ी व्यवस्थाएं भी किसानों के हौसले नहीं तोड़ सकीं। जीआईसी मैदान में आयोजित किसान मजदूर अधिकार महापंचायत में किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह के नेतृत्व में किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की। महापंचायत में खेती-किसानी के संकट, गन्ने के बकाया भुगतान, छोटे और सीमांत किसानों की कर्जमाफी, फसलों के लाभकारी मूल्य और खेतिहर मजदूरों के अधिकारों जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। कार्यक्रम के बाद किसानों ने जीआईसी मैदान से कलेक्ट्रेट तक रोष मार्च निकालकर अपनी मांगें प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
ठाकुर पूरण सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस महापंचायत में किसानों और मजदूरों से जुड़े सवालों को केंद्र में रखा गया। महापंचायत का उद्देश्य खेती-किसानी से जुड़ी समस्याओं और ग्रामीण श्रमिकों की मांगों को एक मंच पर उठाना रहा। खराब मौसम के बावजूद किसानों की मौजूदगी ने आयोजन को चर्चा में ला दिया। बारिश के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं, लेकिन किसानों ने अपनी मांगों को सामने रखने का सिलसिला जारी रखा।
बारिश ने बिगाड़ी व्यवस्था, लेकिन किसानों का पहुंचना जारी रहा
जीआईसी मैदान में महापंचायत के लिए सुबह से तैयारियां की गई थीं। हालांकि, तेज बारिश और हवा ने आयोजकों की मुश्किलें बढ़ा दीं। मैदान में पानी भर गया और टेंट गिरने से व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं। खराब मौसम के कारण सुबह किसानों की आमद धीमी रही, लेकिन इसके बावजूद किसान महापंचायत में पहुंचते रहे। दोपहर बाद मैदान में किसानों की संख्या बढ़ती गई।
मौसम की चुनौती के बीच किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह के नेतृत्व में आयोजित महापंचायत में किसानों ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। खेती की बढ़ती लागत, फसलों का उचित मूल्य और किसानों की आर्थिक स्थिति से जुड़े सवाल चर्चा के केंद्र में रहे।
ठाकुर पूरण सिंह के नेतृत्व में उठे किसान हितों के मुद्दे
महापंचायत में गन्ने के बकाया भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने मांग की कि गन्ने का भुगतान जल्द कराया जाए, जिससे उन्हें खेती और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में राहत मिल सके। इसके साथ ही छोटे और सीमांत किसानों की कर्जमाफी की मांग भी रखी गई।
किसानों ने फसलों का लाभकारी मूल्य दिलाने और किसान आय आयोग के गठन की मांग उठाई। डीजल, बिजली और खाद की बढ़ती लागत पर नियंत्रण का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। किसानों का कहना था कि खेती में लगातार बढ़ते खर्च के बीच फसल का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। ठाकुर पूरण सिंह के नेतृत्व में आयोजित महापंचायत में इन समस्याओं को किसानों की आर्थिक स्थिति से जोड़कर उठाया गया।
आवारा पशुओं और प्राकृतिक आपदाओं से राहत की मांग
महापंचायत में आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग की। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल बर्बाद होने पर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग रखी गई।
किसानों ने कहा कि खेती में मेहनत और पूंजी लगाने के बाद भी फसल को नुकसान पहुंचने की स्थिति में आर्थिक संकट गहरा जाता है। ऐसे में फसल नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। महापंचायत में खेती से जुड़ी इन चुनौतियों के समाधान पर जोर दिया गया।
खेतिहर मजदूरों के अधिकारों की भी उठाई आवाज
किसान मजदूर अधिकार महापंचायत में खेतिहर मजदूरों की समस्याओं को भी प्रमुखता दी गई। मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग उठाई गई।
महापंचायत में किसानों के साथ मजदूरों के हितों को भी शामिल करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सामने रखा गया। खेती और मजदूरी पर निर्भर परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की गई।
महापंचायत के बाद कलेक्ट्रेट तक रोष मार्च
महापंचायत में अपनी मांगें उठाने के बाद किसानों ने जीआईसी मैदान से कलेक्ट्रेट तक रोष मार्च निकाला। बारिश के बीच किसानों ने प्रदर्शन कर अपनी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश की। ठाकुर पूरण सिंह के नेतृत्व में आयोजित महापंचायत के बाद निकाले गए मार्च के जरिए किसानों ने गन्ना भुगतान, कर्जमाफी, फसलों के लाभकारी मूल्य और मजदूरों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया।
मांगों पर कार्रवाई का इंतजार
किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह के नेतृत्व में आयोजित महापंचायत में किसानों और खेतिहर मजदूरों से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए गए। खराब मौसम के बावजूद कार्यक्रम आयोजित हुआ और इसके बाद कलेक्ट्रेट तक रोष मार्च निकाला गया।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि महापंचायत में उठाई गई मांगों पर शासन और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं। गन्ने के बकाया भुगतान, कृषि लागत पर नियंत्रण, कर्जमाफी, फसल नुकसान का मुआवजा और आवारा पशुओं से राहत जैसे मुद्दों पर किसानों को ठोस कार्रवाई का इंतजार रहेगा।
