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मुज़फ़्फ़रनगर की सड़कें बनीं जंग का अखाड़ा, 3 दिन में दूसरी वारदात दिनदहाड़े मारपीट, गाड़ी सवार लहूलुहान—

रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ़्फ़रनगर। शहर की सड़कें अब सफ़र के लिए नहीं, बल्कि खुलेआम गुंडागर्दी का मैदान बनती जा रही हैं। बीते तीन दिनों में दूसरी सनसनीखेज़ वारदात ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मालवीय चौक के पास आज दिनदहाड़े एक गाड़ी सवार युवक के साथ मारपीट की घटना सामने आई, जिसमें बाइक सवार युवक ने किसी बात को लेकर गाड़ी सवार पर हमला कर दिया। मारपीट इतनी बेरहमी से हुई कि गाड़ी सवार युवक लहूलुहान हो गया और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
आपको बता दे इससे पहले तीन दिन पहले भी शहर में ट्रॉली चालक के साथ कुछ गाड़ी सवारों ने सरेआम मारपीट की थी। उस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसने शहरवासियों को झकझोर कर रख दिया था। बावजूद इसके, न तो सबक लिया गया और न ही सख़्ती दिखाई दी—नतीजा आज दूसरी वारदात के रूप में सामने है।
शहर में भारी वाहनों की बेलगाम आवाजाही, हर चौराहे पर जाम और ट्रैफिक अव्यवस्था लोगों के सब्र का इम्तिहान ले रही है। मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसा में बदल रही है। हैरानी की बात यह है कि प्रमुख चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ऐसी घटनाएं रुक नहीं रहीं। सवाल यह है कि जब निगरानी है तो कार्रवाई क्यों नहीं? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि नो-एंट्री के समय भी ट्रक, डंपर और भारी वाहन बेधड़क शहर के भीतर घुस रहे हैं। जाम में फंसी एंबुलेंस, स्कूली वाहन और आम लोग रोज़ जोखिम उठाने को मजबूर हैं। नियम काग़ज़ों में हैं, ज़मीन पर नहीं।
अब ज़रूरत है त्वरित और सख़्त कार्रवाई की—भारी वाहनों पर समयबद्ध रोक, वैकल्पिक मार्गों की अनिवार्य व्यवस्था, सीसीटीवी और ट्रैफिक पुलिस की जवाबदेही तय करना, और सड़क पर हिंसा करने वालों पर त्वरित कानूनी शिकंजा। वरना मुज़फ़्फ़रनगर की सड़कें यूँ ही जंग का अखाड़ा बनी रहेंगी और किसी दिन यह लापरवाही अपूरणीय नुकसान में बदल सकती है।

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