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मानवता की मिसाल मरणोपरांत देहदान

रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। मुज़फ़्फ़रनगर के भोपा क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव में मानवता का ऐसा अद्भुत उदाहरण सामने आया है जिसने पूरे जनपद में एक नई सोच को जन्म दिया है। समाज में आज भी मृत्यु के बाद देहदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियाँ और रूढ़िवादी विचार दिखाई देते हैं, लेकिन सिकंदरपुर के एक परिवार ने इन सभी परंपरागत मान्यताओं को पीछे छोड़ते हुए मानवता और वैज्ञानिक सोच की राह चुनी है। स्वर्गीय त्रिकाशी देवी की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके बेटे रणवीर सिंह इंसा ने उनकी देह मेडिकल कॉलेज को दान कर दी। यह निर्णय सिर्फ एक मां के सपने को पूरा करने का नहीं, बल्कि विज्ञान, शिक्षा और समाज के प्रति परिवार की गहरी संवेदनशीलता का प्रतीक है। गांव में इस निर्णय के बाद जिस तरह माहौल बना, वह बताता है कि लोगों ने इस साहसिक कदम को दिल से सराहा है। परिवार के इस निर्णय को “महान सेवा”, “जीवनदान” और “मानवता की सर्वोच्च मिसाल” के रूप में देखा जा रहा है। सिकंदरपुर गांव में उठाया गया यह कदम यह भी दिखाता है कि जब कोई व्यक्ति समाज की रूढ़ियों से ऊपर उठकर मानव कल्याण को प्राथमिकता देता है, तो वह वाकई इतिहास रच देता है।

भोपा ब्लॉक के सिकंदरपुर गांव में स्वर्गीय त्रिकाशी देवी के परिवार ने ऐसा काम किया है जो समाज में आज भी बहुत कम लोग कर पाते हैं। त्रिकाशी देवी ने अपने जीवनकाल में इच्छा जताई थी कि मृत्यु के बाद उनकी देह मेडिकल छात्रों की शिक्षा और रिसर्च के लिए दान कर दी जाए।

परिवार ने धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं से ऊपर उठकर उनकी इस अंतिम इच्छा का सम्मान किया और राजश्री आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, बरेली की टीम को बुलाकर समस्त प्रक्रिया पूरी कराई। इस निर्णय ने पूरे क्षेत्र में मानवता के प्रति नई जागरूकता की लहर पैदा कर दी है।

त्रिकाशी देवी के बेटे रणवीर सिंह इंसा ने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा डेरा सच्चा सौदा के गुरु पूज्य डॉ. संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा से मिली है। उन्होंने कहा कि डेरा द्वारा चलाए जा रहे मानवता भलाई कार्यों ने परिवार को यह साहस दिया कि वे समाज में नए विचार को आगे बढ़ाएं।

गांव में अंतिम विदाई के समय भावुक वातावरण देखने को मिला। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर सोसायटी के सदस्य, ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से आए लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने परिवार के इस महत्त्वपूर्ण निर्णय की प्रशंसा की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

गांववालों का कहना है कि यह कार्य भविष्य की पीढ़ियों को देहदान जैसी महत्वपूर्ण पहल की ओर प्रेरित करेगा। स्वर्गीय त्रिकाशी देवी अपने पीछे दो पुत्र—रणवीर इंसा और जगवीर इंसा, पोत्र सचिन और नितिन तथा भरा–पूरा परिवार छोड़ गई हैं।

गांव सिकंदरपुर में हुई यह ऐतिहासिक पहल अब पूरी तरह चर्चा का विषय बनी हुई है और इसे मानवता का सर्वोच्च दान माना जा रहा है।

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