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किसानों का फूटा गुस्सा: खरीद नीति से लेकर आलू के दाम तक सरकार को घेरा, राष्ट्रपति के नाम सौंपा तीखा ज्ञापन

रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। किसानों की समस्याओं को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) एवं भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का संकेत दे दिया है। किसान नेताओं ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए साफ चेतावनी दी कि यदि मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो सड़कों पर बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
ज्ञापन में प्रदेश अध्यक्ष अंकित चौधरी और जिलाध्यक्ष अक्षय त्यागी के नेतृत्व में किसानों ने रबी सीजन की फसलों, खासकर गेहूं और सरसों की खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग उठाई। किसानों का कहना है कि हरियाणा सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियम पूरी तरह अव्यावहारिक हैं, जिनसे मंडियों में भारी अव्यवस्था और लंबा जाम लगने की आशंका है। बायोमेट्रिक सत्यापन और ट्रैक्टर-ट्रॉली पर नंबर प्लेट की अनिवार्यता को किसानों ने ‘काला नियम’ बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।
आलू के गिरते दामों को लेकर भी किसानों का गुस्सा साफ झलका। उनका कहना है कि हालात इतने खराब हैं कि किसानों को लागत तक नहीं मिल पा रही, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार से आलू किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज और उचित मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग की।
इसके अलावा, प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी किसानों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने साफ कहा कि खेती, डेयरी और पोल्ट्री जैसे क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा जाए और विदेशी कृषि उत्पादों के आयात पर रोक लगाई जाए, ताकि देश के किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।
किसान नेताओं ने यह भी मांग की कि किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं। उनका कहना है कि यह फैसला किसानों के प्रति सरकार की सकारात्मक मंशा को दर्शाएगा।
इस मौके पर वसीम खान समेत कई किसान नेताओं ने एकजुट होकर कहा कि यदि सरकार ने किसानों की आवाज को अनसुना किया, तो आंदोलन और तेज होगा, ।

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