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अनूपपुर ब्यूरो रिपोर्ट जमुना कॉलोनी पोस्ट ऑफिस: भ्रष्टाचार का सिंडिकेट और डाक अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह की संदिग्ध चुप्पी!”– जब सरकारी डाकघर रिश्वतखोरी का चौपाल बन जाए और जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी की चादर ओढ़ लें, तो समझ लीजिए सिस्टम सड़ चुका है!

कोतमा की जमुना कॉलोनी में भारतीय डाक विभाग का स्थानीय ब्रांच पोस्ट ऑफिस आज भ्रष्टाचार का खुलेआम अड्डा बन चुका है, और इस पूरे सड़े-गले तंत्र की जड़ में बैठे हैं डाक अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह, जिनकी संदिग्ध चुप्पी अब उन्हें बेकसूर नहीं, बल्कि इस लूट के मास्टरमाइंडों में गिना जाने लगा है।

यह सिर्फ लापरवाही नहीं, अपराध है!
ब्रांच पोस्टमास्टर जी.पी. खजूर ने अपने दामाद अलफोंस इक्का को न केवल पोस्ट ऑफिस का काम सौंप दिया है, बल्कि उसे जनता के निजी और संवेदनशील दस्तावेज़ों तक खुला एक्सेस दे रखा है। एक ऐसा व्यक्ति, जो भारतीय डाक विभाग का कर्मचारी तक नहीं है — वह खाता खोलता है, एटीएम, चेकबुक, पासबुक जारी करता है, और यहाँ तक कि आधार-पैन जैसी गोपनीय जानकारियों के साथ छेड़छाड़ करता है।
यह सीधा-सीधा डेटा सुरक्षा की हत्या है, और ब्रांच पोस्टमास्टर के साथ-साथ डाक अधीक्षक की सरपरस्ती में चल रही संगठित आपराधिक साजिश है।

पुष्पेंद्र सिंह की चुप्पी: अपराध में भागीदारी या सौदेबाजी?
जब इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ, तो अधीक्षक महोदय ने रस्मी तौर पर “कार्रवाई की जाएगी” कहकर बात टाल दी। लेकिन महीनों बीत गए, न पोस्टमास्टर पर कोई ठोस कार्रवाई हुई, न दामाद पर एफआईआर हुई, न ही विभागीय जांच की भनक तक लगी।
तो फिर क्या जनता मूर्ख है? क्या उनके टैक्स के पैसे से तनख्वाह लेने वाले अधिकारी बस कुर्सी गरमाने आए हैं?

पुष्पेंद्र सिंह की चुप्पी अब “मूकदर्शक” की नहीं, “मिलीभगत” की बू दे रही है।
क्या ये रिश्वत की मलाई का मामला है? या फिर रिश्तेदारी की सत्ता चल रही है डाक विभाग में? जब पूरे सिस्टम की इज्जत नीलाम हो रही हो और विभाग का शीर्ष अधिकारी बहरों की तरह बैठा हो, तो यह साफ़ है — गुनहगार सिर्फ नीचे नहीं, ऊपर भी बैठे हैं।

जनता का धैर्य अब टूट चुका है।
आज जमुना कॉलोनी का हर नागरिक डरा हुआ है। किसी का आधार सुरक्षित नहीं, किसी का बैंक खाता। अगर कल को कोई साइबर अपराध होता है, तो क्या डाक अधीक्षक जवाब देंगे? क्या पुष्पेंद्र सिंह ये गारंटी लेंगे कि उनके संरक्षण में काम कर रहा दामाद कोई गड़बड़ी नहीं करेगा?

अब वक्त है उठाने का, कान पकड़कर कुर्सी से उतारने का!
अगर डाक विभाग के उच्च अधिकारी अपनी गरिमा को बनाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें तुरंत कार्रवाई करनी होगी। जी.पी. खजूर को तत्काल सस्पेंड कर, अलफोंस इक्का पर अपराध दर्ज कर सलाखों के पीछे भेजा जाए। और सबसे पहले, पुष्पेंद्र सिंह को अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए नैतिकता के आधार किन्योकी कारवाही नहीं कर पाए उनके खिलाफ विभागीय जांच होनी चाहिए, ताकि यह साफ़ हो सके कि वो मूकदर्शक थे या इस गंदे खेल के हिस्सेदार।

जनता अब इंकलाब की ओर बढ़ रही है। डाकघर बचाना है तो भ्रष्टाचारियों की गर्दन पकड़नी होगी। वरना वह दिन दूर नहीं जब लोग अपने खातों के साथ-साथ अपना भरोसा भी इस तंत्र से हटा लेंगे — और तब डाक विभाग की साख को बचाने के लिए कोई ‘पुष्पेंद्र सिंह’ नहीं आएगा।

ये खबर नहीं, आग है — और आग जब फैलती है, तो कुर्सियाँ भी जलती हैं

इनका कहना है
जब हमारे संवाददाता ने जीपी खजूर से संपर्क किया तो उन्होंने कहा की नई-नई टेक्नोलॉजी आ रही है हम बाहर के लोगों से काम कराएंगे ही और हम अपने ऊपर के अधिकारियों से मिल लिए हैं उन्होंने कह दिया है कोई दिक्कत नहीं है

जीपी खजूर
जमुना पोस्ट ऑफिस पोस्ट मास्टर

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