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महिला सुरक्षा के दावों पर सवाल, बिंदकी में पुलिस की भूमिका कठघरे में

रिपोर्ट – अनिल कुमार

फतेहपुर। भाजपा की डबल इंजन की सरकार प्रदेश भर में महिला सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर योजनाओं और सख्त कानूनों की बात करती है, लेकिन बिंदकी कोतवाली क्षेत्र में जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां एक पीड़ित युवती को गंभीर आरोपों के बावजूद न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जबकि पुलिस पर आरोप है कि वह पीड़िता की बजाय आरोपियों का पक्ष ले रही है। मामला शादी का झांसा देकर लंबे समय तक शारीरिक शोषण, दहेज की मांग पर निकाह से इंकार, धमकी और मानसिक उत्पीड़न से जुड़ा है। पीड़ित युवती ने कोतवाली में नामजद आरोपियों के खिलाफ लिखित शिकायती पत्र देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की, लेकिन आरोप है कि कोतवाली प्रभारी हेमंत मिश्रा ने गंभीरता दिखाने के बजाय मामले को टालने का रवैया अपनाया। पीड़िता का कहना है कि वह लगातार थाना के चक्कर काट रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता ने महिला थाना में भी न्याय की आस लेकर दस्तक दी, लेकिन वहां से भी उसे निराशा ही हाथ लगी। महिला थाना के चक्कर लगाने के बावजूद न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही उसे किसी प्रकार की सुरक्षा या भरोसा मिला।
स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि कोतवाली प्रभारी मिश्रा अक्सर दलालों और प्रभावशाली लोगों के साथ बैठकों में व्यस्त रहते हैं, जिससे आम पीड़ितों की सुनवाई हाशिये पर चली जाती है। यही वजह है कि क्षेत्र में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। जानकारों का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करती, तो यह सीधे-सीधे सरकार की महिला सुरक्षा नीतियों को कमजोर करता है। एक ओर सरकार महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान की बात करती है, दूसरी ओर जमीनी स्तर पर पुलिस की लापरवाही उन नीतियों पर बट्टा लगा रही है। पीड़ित युवती का आरोप है कि पुलिस का यह रवैया उसे मानसिक रूप से तोड़ रहा है और आरोपी पक्ष के हौसले बढ़ा रहा है। उसे लगातार धमकियां मिलने की बात भी सामने आ रही है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अब सवाल यह उठता है कि क्या बिंदकी कोतवाली प्रभारी की कार्यशैली पर उच्चाधिकारी संज्ञान लेंगे, या फिर महिला सुरक्षा के नाम पर किए जा रहे सरकारी दावे ऐसे ही कागजों तक सीमित रह जाएंगे। यह मामला न सिर्फ एक पीड़िता के न्याय का है, बल्कि सरकार की छवि और महिला सुरक्षा के भरोसे का भी है।

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