इलाज बना खतरा… लापरवाही या सिस्टम की बड़ी चूक

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रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। मुज़फ्फरनगर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां इलाज के नाम पर एक 10 साल की मासूम बच्ची की ज़िंदगी से खिलवाड़ किए जाने का आरोप है। गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर बच्ची का ऑपरेशन कर दिया गया, जबकि सर्जरी के दौरान अपेंडिक्स था ही नहीं—इस खुलासे ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मामला थाना सिविल लाइन क्षेत्र के सदर बाजार का है, जहां एक परिवार अपनी 10 वर्षीय बेटी को इलाज के लिए सदर बाजार स्थित डॉक्टर इकबाल के पास लेकर पहुंचा था। परिजनों के मुताबिक बच्ची को कुछ दिन पहले सामान्य बुखार आया था, लेकिन डॉक्टर ने बिना विस्तृत जांच के सीधे अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दे दी।
पीड़ित परिवार शहर कोतवाली क्षेत्र के लद्दावाला मोहल्ले का रहने वाला है, जो बेहतर इलाज की उम्मीद में यहां आया था।

परिजनों ने अस्पताल के बाहर एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर से अल्ट्रासाउंड कराया, जिसकी रिपोर्ट में अपेंडिक्स की समस्या बताई गई। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर डॉक्टर ने बिना किसी दूसरी पुष्टि या दोबारा जांच के बच्ची का ऑपरेशन करने का फैसला ले लिया।

चौंकाने वाली बात यह रही कि ऑपरेशन के दौरान ही डॉक्टर को पता चल गया कि बच्ची में अपेंडिक्स की कोई समस्या नहीं है। इसके बावजूद ऑपरेशन जारी रखा गया और बच्ची के पेट पर 11 टांके लगा दिए गए।

ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने परिजनों को बताया कि अपेंडिक्स नहीं था, बल्कि पेट में पस जमा थी, जिसे निकाल दिया गया। हालांकि बाद में 10 हजार रुपये वापस कर दिए गए, लेकिन यह सवाल अब भी खड़ा है कि क्या पैसों की वापसी से इतनी बड़ी चिकित्सकीय लापरवाही को नजरअंदाज किया जा सकता है?
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक डॉक्टर को केवल एक निजी सेंटर की रिपोर्ट के आधार पर इतनी बड़ी सर्जरी कर देनी चाहिए थी? क्या मरीज की दोबारा जांच जरूरी नहीं थी?

वहीं, डॉक्टर इकबाल भी अपनी सफाई देते हुए कह रहे हैं कि उन्होंने अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर ही ऑपरेशन किया और गलती उस सेंटर की है जिसने गलत रिपोर्ट दी।

लेकिन पीड़ित परिवार इस तर्क को सिरे से खारिज कर रहा है। उनका कहना है कि एक जिम्मेदार डॉक्टर का कर्तव्य होता है कि वह किसी भी रिपोर्ट की पुष्टि करे, खासकर तब जब मामला एक मासूम की जान से जुड़ा हो।
गुस्साए परिजन अब डॉक्टर और संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर थाना सिविल लाइन पहुंचे हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजे जाने की बात कही है।

इस पूरे मामले में जब सीएमओ डॉक्टर सुनील तेवतिया से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि प्रकरण की जांच कराई जाएगी और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है—गलत रिपोर्ट देने वाला सेंटर या बिना पुष्टि के ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर?

और क्या इस मासूम को न्याय मिल पाएगा, या फिर यह मामला भी जांच के दायरे में दबकर रह जाएगा?

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