रिपोर्ट – कबीर


मुज़फ्फरनगर। जनपद की किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड, तावली में किसानों की मेहनत की कमाई पर ‘सिस्टमेटिक चोट’ के आरोप सामने आए हैं। क्षेत्र के किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए समिति के एमडी संजीव कुमार पर पिछले लगभग पांच वर्षों से ऋण बदलाई की प्रक्रिया को अवैध कमाई का जरिया बनाने का आरोप लगाया है।
किसानों का कहना है कि हर साल ऋण नवीनीकरण (बदलाई) के नाम पर कुल ऋण राशि पर अतिरिक्त छह प्रतिशत तक की वसूली की जाती है। यह रकम किसी अधिकृत शुल्क के रूप में दर्ज नहीं होती, बल्कि कथित तौर पर दबाव बनाकर ली जाती है। किसानों ने आरोप लगाया कि यदि कोई किसान भुगतान से मना करता है तो उसकी फाइल लंबित कर दी जाती है।
इतना ही नहीं, नया ऋण स्वीकृत कराने के नाम पर प्रति किसान पांच हजार रुपये तक की मांग की जाती है। किसानों का कहना है कि बिना “रकम” दिए फाइल आगे नहीं बढ़ती। यह स्थिति छोटे और सीमांत किसानों के लिए दोहरी मार साबित हो रही है—एक ओर कर्ज का बोझ, दूसरी ओर कथित अवैध वसूली।
मामले को लेकर किसानों ने सहकारी संघ के माध्यम से होने वाले अनाज वितरण में भी घोटाले का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है और रिकॉर्ड की जांच कराई जाए तो बड़ी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। विरोध करने पर अभद्र व्यवहार और काम रोक देने की धमकी दिए जाने का भी आरोप है।
किसानों के अनुसार पूर्व में संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई थी। 25 फरवरी 2026 को जांच के लिए अधिकारी समिति पहुंचे, लेकिन आरोप है कि एमडी ने जांच में सहयोग से इनकार कर दिया और अधिकारी को लौटने को कह दिया। इससे पूरे प्रकरण पर और अधिक संदेह गहराता नजर आ रहा है।
गुरुवार को बड़ी संख्या में किसान जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
शिकायतकर्ताओं में बोबी, देशाती, रेन्द्र कुमार, राधेश्याम नागी, आदिरा कुमार, बाबूराम, शिवकुमार, जिन्डसिंह और देवेन्द्र त्यागी सहित अन्य किसान शामिल रहे। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि अन्नदाताओं की इस पीड़ा को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।
