रिपोर्ट – रजनीश शर्मा

हरदोई। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी नए विनियम 2026 के विरोध में आज जनपद हरदोई की सड़कें ‘जनाक्रोश मार्च’ की गवाह बनीं। ‘ब्राह्मण परशुराम संगठित समाज संरक्षण विश्व फाउंडेशन’ और सी.एस.एन. कॉलेज के वर्तमान व पूर्व छात्र-छात्राओं ने इस नए कानून को ‘विभेदकारी’ और ‘काला कानून’ करार देते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।
आंदोलन की शुरुआत स्टेशन रोड स्थित राम जानकी मंदिर से हुई, जहाँ भारी संख्या में छात्र और युवा एकत्र हुए। यहाँ धरना देने के पश्चात प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं—अक्षय प्रताप सिंह ‘रानू’, अमरेन्द्र विक्रम सिंह, सूर्यांश प्रताप सिंह और हर्ष मिश्रा—ने कहा कि 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित यह कानून उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के नाम पर वैमनस्य फैलाने का कार्य करेगा।
जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि यह विनियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समता के अधिकार) का उल्लंघन करता है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह कानून प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है, क्योंकि इसमें आरोपी के लिए कठोर दंड का प्रावधान तो है, लेकिन झूठे आरोप लगाने वालों के विरुद्ध किसी कार्यवाही का उल्लेख नहीं है। छात्रों ने आशंका जताई कि इससे सामान्य वर्ग के शिक्षकों और छात्रों का मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न बढ़ेगा।
राम जानकी मंदिर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन कलेक्ट्रेट में धरने के साथ संपन्न हुआ। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे के दौर में इस तरह के जाति और वर्ग आधारित कानून एक खंडित समाज का निर्माण करेंगे। युवाओं ने मांग की है कि इस ‘कलुषित’ कानून को तत्काल निरस्त किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और गति दी जाएगी।
