सोनवर्षा गांव में फलदार वृक्षों का कत्लेआम, पुलिस–वन विभाग पर मिलीभगत के आरोप

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आम–महुआ के पेड़ बने निशाना, कब्रिस्तान के बगल में दबंग ठेकेदार ने इलेक्ट्रॉनिक मशीन से गिराए 5 फलदार वृक्ष

पर्यावरण संरक्षण के दावे खोखले, जिम्मेदार बने मूकदर्शक

रिपोर्ट – अनिल कुमार

फतेहपुर (गाजीपुर)। गाजीपुर थाना क्षेत्र के सोनवर्षा गांव में पर्यावरण को झकझोर देने वाली गंभीर घटना सामने आई है। गांव में हरे-भरे फलदार आम और महुआ के वृक्षों को बेरहमी से काट दिया गया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा कृत्य पुलिस और वन विभाग की मिलीभगत से अंजाम दिया गया।
नियमों के अनुसार फलदार एवं हरे वृक्षों की कटाई के लिए विधिवत अनुमति अनिवार्य होती है, लेकिन इस मामले में नियमों को ताक पर रख दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, एक दबंग ठेकेदार ने इलेक्ट्रॉनिक मशीन का इस्तेमाल कर गांव के कब्रिस्तान के बगल में स्थित कम से कम पांच फलदार हरे वृक्षों को धराशायी कर दिया।
हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी कार्रवाई के दौरान न तो वन विभाग की ओर से कोई ठोस रोक-टोक दिखाई दी और न ही पुलिस द्वारा कोई प्रभावी हस्तक्षेप किया गया। इससे विभागीय भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आम और महुआ जैसे वृक्ष केवल पर्यावरण संतुलन ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़े होते हैं। इन पेड़ों की कटाई से पर्यावरणीय नुकसान के साथ-साथ आर्थिक क्षति भी हुई है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब सरकार एक ओर हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करती है, तो ऐसे मामलों में जिम्मेदार विभाग आंख मूंदकर क्यों बैठे रहते हैं? क्या दबंगों के सामने कानून पूरी तरह बेबस हो चुका है?
घटना को लेकर गांव में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं वनविभाग रेंजर रूप सिंह से
इस संबंध में जब दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि “मामले की जांच की जा रही है और ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।”
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता दिखाता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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