विश्वकर्मा चौक समिति ट्रस्ट पर लगाए गए आरोपों को ट्रस्ट ने बताया निराधार, SSP से कार्रवाई की मांग

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रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ़्फ़रनगर। विश्वकर्मा चौक समिति ट्रस्ट ने अपने गठन को लेकर उठाए गए सवालों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायतकर्ता नरेश विश्वकर्मा के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ट्रस्ट भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के अनुसार 02 जुलाई 2024 को विधिवत पंजीकृत है और इसका पंजीकरण क्रमांक 122 दर्ज है।

ट्रस्ट अध्यक्ष जगदीश पांचाल ने बताया कि पंजीकरण से पूर्व यह संस्था एक अपंजीकृत समिति के रूप में कार्यरत थी। 26 मई 2024 को आयोजित सामान्य बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर समिति को ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत करने का निर्णय लिया गया था। इसी बैठक में अपंजीकृत समिति के महामंत्री रहे जगदीश पांचाल को ट्रस्ट का अध्यक्ष और मुकेश धीमान को महासचिव चुना गया था। इसके पश्चात निवर्तमान पदाधिकारियों को अधिकृत कर ट्रस्ट का संविधान तैयार कर पंजीकरण कराया गया।

ट्रस्ट का दावा है कि पंजीकरण के बाद पुरानी अपंजीकृत समिति स्वतः भंग हो गई और इसके सभी अधिकार नवीन ट्रस्ट को हस्तांतरित हो गए। इसके बावजूद 09 दिसंबर 2025 को नरेश विश्वकर्मा द्वारा SSP कार्यालय में एक “साक्ष्य-विहीन और असत्य” प्रार्थना-पत्र देकर ट्रस्ट के गठन पर प्रश्नचिह्न लगाने का असफल प्रयास किया गया।

ट्रस्ट पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि नरेश विश्वकर्मा फर्जी तरीके से स्वयं को अब-निष्क्रिय समिति का अध्यक्ष बताते हुए अवैध लेटरहेड और रसीद बुक का उपयोग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, फर्जी रसीदों के माध्यम से धन उगाही भी की जा रही है, जिन पर मुकेश धीमान गालिबपुर के हस्ताक्षर पाए गए हैं।

ट्रस्ट ने यह भी आरोप लगाया है कि नरेश विश्वकर्मा अपनी योग्यता के विपरीत स्वयं को ‘डॉक्टर’ बताकर समाज को गुमराह कर रहे हैं, जबकि उनके पास किसी प्रकार की चिकित्सकीय डिग्री नहीं है। इस संबंध में मामला जिला चिकित्सा अधिकारी के स्तर पर जांचाधीन है।

ट्रस्ट अध्यक्ष जगदीश पांचाल ने SSP से मांग की है कि उपलब्ध पंजीकृत दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच कर नरेश विश्वकर्मा के विरुद्ध उचित विधिक कार्रवाई की जाए।

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