रिपोर्ट – कबीर


मुजफ्फरनगर। अक्षय तृतीया के मद्देनजर जिले में बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने बड़ा जनजागरूकता अभियान चलाया। “बाल विवाह मुक्त मुजफ्फरनगर” अभियान के तहत शनिवार को पब्लिक एड्रेसिंग सिस्टम के माध्यम से शहर की सड़कों पर जागरूकता मार्च निकाला गया, जिसमें लोगों से आगे आकर बाल विवाह रोकने में अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की गई।
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और मुख्य विकास अधिकारी कण्डारकर कमल किशोर देशभूषण के निर्देशन में आयोजित यह अभियान जिला प्रोबेशन कार्यालय से शुरू हुआ। जागरूकता मार्च प्रकाश चौक, जिला परिषद, झांसी रानी रोड से होता हुआ कचहरी परिसर में जाकर सम्पन्न हुआ। पूरे रास्ते लोगों को संदेश दिया गया कि बाल विवाह न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि कानूनन अपराध भी है।
बाल कल्याण समिति के सदस्य डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि समाज को बदलने के लिए हर नागरिक को आगे आना होगा। उन्होंने लोगों को बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह कराने, करवाने या सहयोग करने पर दो वर्ष तक की सजा, एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है। किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या स्थानीय पुलिस को देने की अपील की गई।
अभियान में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी संजय कुमार, संरक्षण अधिकारी नीना त्यागी, विधि सह परिवीक्षा अधिकारी हेमलता, केंद्र प्रबंधक पूजा नरूला समेत कई अधिकारियों ने भाग लिया। सामाजिक कार्यकर्ता आरिफ, आउटरीच कार्यकर्ता अजय और सोनू की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
प्रशासन ने साफ संदेश दिया कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को खत्म करने के लिए समाज और शासन दोनों को मिलकर आगे आना होगा।
