नॉन बैटल कैजुअल्टी वाले सैनिकों के परिवारों को हक दिलाने की उठी आवाज, लेखिका शिवि की सांसद राघव चड्ढा से मुलाकात

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रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर/नई दिल्ली। देश की सेवा में प्राण न्योछावर करने वाले हर सैनिक के परिवार को समान सम्मान और अधिकार दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आ रही है। इसी कड़ी में “आशिवी – शहीद से एक पत्नी की शिकायत” उपन्यास की लेखिका शिवि आशीष स्वामी ने आम आदमी पार्टी के युवा नेता एवं सांसद Raghav Chadha से मुलाकात कर एक अहम मुद्दा उनके सामने मजबूती से रखा।
मुलाकात के दौरान लेखिका ने अपने उपन्यास के माध्यम से उन वीरांगनाओं की पीड़ा और संघर्ष को उजागर किया, जिनके पति देश सेवा के दौरान नॉन बैटल कैजुअल्टी की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने बताया कि जहां बैटल कैजुअल्टी में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों को सरकार द्वारा रोजगार, बच्चों की शिक्षा, टोल टैक्स में छूट और आवास जैसी कई सुविधाएं मिलती हैं, वहीं नॉन बैटल कैजुअल्टी के मामलों में परिवारों को इन अधिकारों से वंचित रहना पड़ता है।
लेखिका ने जोर देते हुए कहा कि हर साल भारतीय सशस्त्र बलों में सैकड़ों सैनिक दुर्घटनाओं, मौसम की मार और ट्रेनिंग के दौरान अपनी जान गंवा देते हैं, लेकिन उनके परिवार आज भी रोजगार, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “देश सेवा में जान देने वाले हर सैनिक का परिवार सम्मान और सुरक्षा का हकदार है, चाहे उसकी मृत्यु किसी भी श्रेणी में क्यों न हो।”
इस संवेदनशील मुद्दे पर सांसद Raghav Chadha ने गंभीरता दिखाते हुए आश्वासन दिया कि वह इस विषय को प्राथमिकता के साथ उठाएंगे और उचित मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं और समाज के ज्वलंत मुद्दों को संसद तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है और वह इसे पूरी प्रतिबद्धता से निभाएंगे।
लेखिका शिवि आशीष स्वामी ने सांसद के प्रति विश्वास जताते हुए कहा कि वह जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने वाले नेताओं में शामिल हैं। इस मुलाकात से नॉन बैटल कैजुअल्टी में शहीद सैनिकों के परिवारों, खासकर वीरांगनाओं के अधिकारों को लेकर एक नई उम्मीद जगी है।

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