रिपोर्ट – एकरार खान

गाजीपुर। जनपद के सैदपुर क्षेत्र में स्थित अजीत डायग्नोस्टिक एंड अल्ट्रासाउंड सेंटर इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है। स्थानीय लोगों, मरीजों और कुछ जागरूक नागरिकों ने सेंटर के संचालन पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी तरीके से चलाए जाने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लगने लगे हैं।
योग्य डॉक्टर की मौजूदगी पर संदेह
सबसे बड़ा आरोप यह है कि सेंटर पर न तो कोई पंजीकृत एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद है और न ही एमएस या रेडियोलॉजिस्ट विशेषज्ञ, इसके बावजूद यहां अल्ट्रासाउंड जैसी संवेदनशील जांच धड़ल्ले से की जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिरकार इन रिपोर्टों को तैयार कौन कर रहा है और उनकी विश्वसनीयता कितनी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना योग्य विशेषज्ञ के इस तरह की जांच कराना सीधे तौर पर मरीजों के जीवन से खिलवाड़ है। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर ही कई गंभीर बीमारियों का इलाज तय होता है, ऐसे में गलत रिपोर्ट मरीज को गलत उपचार की ओर धकेल सकती है।
फर्जी संचालन और नियमों की अनदेखी के आरोप
सूत्रों के मुताबिक, सेंटर पर जरूरी सरकारी मानकों और नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि न तो वहां आवश्यक लाइसेंस की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित है और न ही तकनीकी स्टाफ की योग्यता स्पष्ट की जाती है।
यह भी कहा जा रहा है कि मरीजों से जांच के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है, लेकिन सुविधा और पारदर्शिता का अभाव बना रहता है। कई लोगों ने शिकायत की है कि रिपोर्ट देने में देरी होती है और कई बार रिपोर्ट की गुणवत्ता भी संदिग्ध लगती है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल
इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के लोगों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मांग की है कि सेंटर की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो सेंटर को तत्काल बंद कर संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रबंधन की चुप्पी
इस पूरे मामले में सेंटर प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और आम जनता को सुरक्षित एवं पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

